हरियाणा के फतेहाबाद के जाखल के गांव तलवाड़ी में सोमवार को एनजीटी द्वारा प्रस्तावित ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जोहड़ की खोदाई का काम भारी विरोध के बीच शुरू करवाया गया। खोदाई का ग्रामीणों व महिलाओं ने जेसीबी के आगे खड़े होकर भारी विरोध किया। विरोध करने वाले जाखल-भूना रोड को जाम करके बैठ गए। इस दौरान दो महिलाओं की तबीयत भी बिगड़ गई।
मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने विरोध कर रही महिलाओं व किसानों को हिरासत में लेकर पुलिस की बस में बैठाकर म्योंद चौकी में भेज दिया। 25-30 लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके बाद जोहड़ की खोदाई का काम जारी रखा गया। वहीं, जिन महिलाओं की तबीयत बिगड़ी, उन्हें अस्पताल ले जाया गया। तीन घंटे बाद हिरासत में लिए गए लोगों को भी छोड़ दिया गया।
गौरतलब है कि गांव तलवाड़ी से गंदे पानी की निकासी घग्गर नदी में हो रही है। मगर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से सख्त हिदायत दी गई है कि किसी भी गांव का गंदा पानी नहरों या कच्चे नाले में नहीं छोड़ा जाएगा। एनजीटी के निर्देश पर गांव तलवाड़ी में 72 लाख 80 हजार रुपये की लागत से प्रोजेक्ट बनाया गया।
इसमें गांव के सारे गंदे पानी को एक जगह पर एकत्रित करते हुए उसे साफ करके सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाना है। इस प्रोजेक्ट का काम शुरू करवाने के लिए मंगलवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट खंड कृषि अधिकारी परमिंदर सिंह, पंचायती राज विभाग के एक्सईएन देवेंद्र सिंह अपने साथ एसडीओ, ग्राम सचिव, जेई और पुलिस प्रशासन से डीएसपी संजय सिंह, जाखल थाना प्रभारी हरफूल सिंह के साथ गांव में पहुंचे।
भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहा से उत्तम सिंह तलवाड़ी, ग्रामीण मेवा सिंह, बूटा सिंह, जसविंदर सिंह, बंटी कासिमपुर, जगरूप सिंह सहित कुछ ग्रामीणों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि पूरा गांव इस प्रोजेक्ट केखिलाफ है क्योंकि गंदा पानी यहां एकत्रित होने से उनकी समस्याएं बढ़ेंगी। बीमारियां फैलने का डर रहेगा। मगर फिर भी प्रशासन धक्काशाही कर रहा है। कुछ ग्रामीण गांव से दूर खाली पड़ी पंचायती भूमि पर तालाब बनाने की मांग कर रहे हैं।
कई बार हो चुका है विरोध
गांव तलवाड़ी में प्रशासन ने इसी प्रोजेक्ट का काम जुलाई में भी शुरू करवाने का प्रयास किया था। 4 जुलाई को टीम पहुंची थी, लेकिन तब भी ग्रामीणों ने विरोध कर दिया था। इसके बाद 9 सितंबर को भी प्रशासनिक टीम गांव में पहुंची। उस समय भी विरोध किया गया तो अधिकारी 3 अक्तूबर तक का समय देकर वापस चले गए।
प्रशासन ने पहले भी कई बार इस प्रोजेक्ट को लंबित कर समय दिया था। परंतु सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद सोमवार को निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। किसानों द्वारा दिए स्टे संबंधी कोई भी कागज प्रस्तुत नहीं किया गया।
-प्रतीक हुड्डा, एसडीएम, टोहाना
ग्रामीणों को पिछली बार 3 अक्तूबर तक कागजात दिखाने के लिए समय दिया गया था। इसके बावजूद कोई भी आधिकारिक पत्र या कानूनी दस्तावेज नहीं दिखा सके। इस नियमानुसार खोदाई का कार्य शुरू करवाया गया। विरोध करने वालों को एकबारगी हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
-परमिंदर सिंह, ड्यूटी मजिस्ट्रेट