मंगलवार को मताना नंदीशाला का शुभारंभ करने के लिए गोसेवा आयोग के चेयरपर्सन भानीराम मंगला फतेहाबाद में थे। इसके बाद उन्होंने डीसी एनके सोलंकी के साथ मिलकर जिस नंदीशाला में पशुओं की उचित देखभाल को लेकर दावे किए, उससे महज कुछ ही दूरी पर पड़े लावारिस सांड़ों के शव मानों व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहे हों। हालांकि उससे भी ज्यादा दुखद था, उन मृत पशुओं के शवों के साथ किया गया बर्ताव।
दरअसल, नंदीशाला में नंदी प्रवेश से पहले ही कुछ लावारिस सांड़ों की मौत हो गई। इनके शवों को नंदीशाला से बाहर रखा गया था। नगर परिषद ने इसकी सूचना मृत पशु उठाने वाले ठेकेदार को दी। उसके कर्मचारियों ने गाड़ी में मृत पशुओं को लादने तक की जहमत नहीं उठाई। ठेकेदार के कारिंदों ने मृत पशुओं को गाड़ी के पीछे बांधा और ऊबड़-खाबड़ जगह और पथरीली सड़क पर घसीटता हुआ ही वहां से ले गया।
पहले भी अस्थाई नंदीशाला के पास मारे जा चुके हैं कई लावारिस सांड़
लघु सचिवालय के पास बनाई गई अस्थाई नंदीशाला में भी बीते दिनों लगातार कई लावारिस सांड़ों की मौत होती रही थी। हालांकि नगर परिषद ने उन सांड़ों का पोस्टमार्टम कराए बिना ही उन्हें दफना दिया था। उस वक्त नप अधिकारियों और नंदीशाला के मैनेजरों पर आरोप था कि पशु भूख के चलते मर गए।
ऐसे में मंगलवार को भी नंदीशाला के पास 3-4 लावारिस सांड़ों का मरना अपने आप में कई सवाल खड़े कर गया। इस बारे में बात करने पर नप अध्यक्ष दर्शन नागपाल ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। इस बारे में ठेकेदार से बात करूंगा।