नोटबंदी के ऐलान और उसके बाद कैशलेस व्यवस्था की ओर सरकार ने कदम बढ़ाया। इस व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भारतीय बाजार कैशलेस व्यवस्था को अपनाएगा। नोटबंदी के तीन माह बाद हमने इसका जवाब जानने के लिए फतेहाबाद के बाजार के दुकानदारों और बैंकों की मौजूदा व्यवस्था का जायजा लिया। ये जानने की कोशिश की कि आखिर कितने दुकानदार-व्यापारी कैशलेस हुए और इसका फायदा हुआ या नुकसान।
दुकानदार तैयार, सरचार्ज कर रहा परेशान
व्यापार मंडल के मुताबिक शहर के सभी मेन बाजारों, चार मरला कॉलोनी, थाना रोड, डीएसपी रोड, धर्मशाला रोड आदि में लगभग 750 से अधिक दुकानें हैं। इन दुकानों का एक बड़ा हिस्सा कैशलेस हो चुका है। काफी लोग कैशलेस की ओर कदम बढ़ा चुके हैं। बहुत थोड़े दुकानदार हैं, जो कैशलेस या ऑनलाइन सिस्टम की बजाए परंपरागत नकद-भुगतान व्यवस्था को अपनाएं हैं। व्यापारी और दुकानदार कैशलेस हो गए, लेकिन इसको लेकर उनके सवाल और कुछ परेशानियां भी हैं, जिनको लेकर वो जूझ रहे हैं। कैशलेस व्यवस्था का सबसे बड़े जरिया बने हैं कार्ड स्वाइप मशीनें और पेटीएम जैसे मोबाइल एप। 31 दिसंबर तक सबकुछ ठीक था क्योंकि तब तक कैशलेस ट्रांजेक्शन पर किसी प्रकार का कोई सरचार्ज नहीं था। लेकिन इसके बाद से कार्ड स्वाइप और पेटीएम जैसे एप से कैश अपने अकाउंट में ट्रांसफर करने पर सरचार्ज लग रहा है। अलग-अलग बैंकों में इसकी दरें अलग हैं। लेकिन ये एक प्रतिशत से लेकर ढाई प्रतिशत जा रहा है। व्यापारियों के अनुसार आजकल धंधा महज 10 फीसदी के नफा-नुकसान पर ही रह गया है। इसमें भी उन्हें स्टॉकेज, माल एंड होना, उधारी आदि को झेलना पड़ता है। अब इसके बाद भी अगर एक-दो प्रतिशत बैंक को सरचार्ज दे दें तो उनके पास इतनी बड़ी इंवेस्टमेंट करके बिजनेस शुरू करने का कोई फायदा नहीं रहेगा।
कैशलेस को लेकर व्यापारियों की राय
सरचार्ज हटाए सरकार
अच्छा कदम है, लेकिन व्यापारी अपना पेट काट कर तो सरकार को नहीं खिलाएगा। जब हम बाकी टैक्स बराबर सरकार को दे ही रहे हैं तो सरकार को भी चाहिए कि कैशलेस ट्रांजेक्शन पर से सरचार्ज हटाए। -मुकेश चोपड़ा, मोबाइल व्यापारी, फतेहाबाद ।
रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया
नोटबंदी के दौरान कैशलेस व्यवस्था को लागू करके हमने एक तरह से सरकार का साथ दिया। अबतक सरकार ने हमें इसका कोई रिटर्न गिफ्ट नहीं दिया। बजट में भी कोई खास रियायत नहीं दी गई। सरकार व्यापारियों की समस्याओं को समझे। -सचिन बजाज, पुस्तक विक्रेता, फतेहाबाद ।
सुविधाएं बढ़ाए सरकार
कैशलेस सिस्टम अपनाकर हमने सरकार का साथ दिया है। बावजूद इसके सरकार ना तो सुविधाएं बढ़ा रही है और ना समस्याएं घटा रही है। कैशलेस का मतलब है कि अधिकतर व्यापारी अब एक नंबर में सब काम दिखाने लगे हैं तो इससे सरकार को तो फायदा हुआ ही है। लेकिन नोटबंदी में साथ देने का सरकार ने कोई ईनाम ईमानदार व्यापारियों को नहीं दिया है। -दीपक मेहता, रेडीमेड शोरूम संचालक , फतेहाबाद ।
कैशलेस व्यवस्था के सामने अभी तक हैं ये समस्याएं
1. पर्याप्त कनेक्विटी का अभी तक इंतजार, कई बार सर्वर डाऊन हो जाता है।
2. पेटीएम और अन्य मोबाइल एप अभी तक 100 फीसदी सुरक्षित नहीं, कई मामले आए, जिसमें पैसे कटे लेकिन सुविधा नहीं मिली।
3. ग्रामीण परिवेश में अभी तक जागरूकता का अभाव।
4. नोटबंदी के दिनों में कैशलेस व्यवस्था का जितना प्रचार, उतना अब नहीं, अधिकारी भी ढीले पड़े।
5. बैंक व्यापारियों की मांग के अनुसार पीओएस की डिमांड पूरी नहीं कर पा रहे।
6. कार्ड पेमेंट या मोबाइल एप से बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने पर सरचार्ज।
बुरे हैं बैंकों के हालात, पीओएस मशीनों की सप्लाई धीमी
बैंक दुकानदारों और व्यापारियों की डिमांड को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। नोटबंदी में अधिकतर लोगों के सामने चेक और कार्ड से पेमेंट का विकल्प था, लेकिन ना तो बैंक चेकबुक की बढ़ी डिमांड को पूरी कर पाए और न ही पीओएस मशीनों की। जिले के औपचारिक आंकड़ों के मुताबिक शहर में अब तक लगभग 250 दुकानों और बूथों पर कार्ड स्वाइप मशीनों के आर्डर पेंडिंग हैं। जबकि तीन माह में 100 के करीब दुकानों को कार्ड स्वाइप मशीनें नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में अधिकतर दुकानदार पेटीएम जैसे मोबाइल एप के सहारे ही काम चला रहे हैं।
रेहड़ी, किराना और दूधिए ने भी अपनाई व्यवस्था
पीओएस का वहन नहीं सकने वाले रेहड़ी चालक, किराना संचालक और दूधिए ने भी मोबाइल एप से कैशलेस ट्रांजेक्शन शुरू कर दी हैं। पालिका मार्केट में बर्गर की रेहड़ी लगाने वाले अधिकतर रेहड़ी संचालकों ने पेटीएम से पेमेंट लेनी शुरू कर रखी है। इसी तरह शहर के अधिकतर किराना दुकान संचालक भी मोबाइल एप के जरिए पेमेंट का लेनदेन कर रहे हैं।
कैशलेस व्यवस्था के फायदे भी काफी
1. ज्यादा कैश जेब में रखने की जरूरत नहीं
2. कार्ड या मोबाइल एप से पेमेंट करने पर कई तरह के डिस्काउंट की संभावना
3. कैशलेस पेमेंट पूरी तरह बैकिंग प्रक्रिया पर आधारित, दुकानदार आपसे पैसा लेकर मुकर नहीं सकता
अफसरों की भी सुनिए
पीओएस की मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं हो पा रही, जिसके चलते अधिकतर व्यापारी मोबाइल एप की मदद ले रहे हैं। बैंक पूरी तरह कोशिश कर रहे हैं कि जल्द से जल्द पीओएस मशीनों का वितरण हो। सीताराम सोनी, लीड बैंक मैनेजर, फतेहाबाद ।
कैशलेस व्यवस्था की ओर से प्रशासन का ध्यान कम नहीं हुआ है। हम इसे प्रमोट करने के हर संभव प्रयास कर रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से नौ फरवरी शुक्रवार को ही पंचायत भवन में बसंत मेला आयोजित कर रहे हैं जिसमें सभी बैंकों के प्रतिनिधि स्टॉल लगाएंगे और डिजिटल बैकिंग के बारे में लोगों को जागरूक करेंगे। - एनके सोलंकी, डीसी, फतेहाबाद ।