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ऐतिहासिक 26 सौ रुपये के स्तर पर पहुंचे धान के दाम

Sun, 20 Nov 2016 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहाबाद
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फतेहाबाद अनाजमंडी में पहुंचा हुआ धान । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 मुच्छल धान के भाव तीन साल पुराने ऐतिहासिक भावों पर पहुंचने शुरू हो गए हैं। शनिवार को धान के दामों में आई तेजी ने नया इतिहास रच दिया। शनिवार को फतेहाबाद में बासमती के दाम 26 सौ रुपये के पार हो गए। जो पिछले साल के मुकाबले भी ज्यादा हैं। किसानों का मानना है कि इस बार उत्पादन के साथ भाव भी ठीक मिलने से उन्हें थोड़ी राहत मिली है। वहीं व्यापारी भी दामों को लेकर खुश है।
      पिछले तीन साल से फसल का खराब होना या भाव में मंदी के चलते किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थी। बीते वर्ष नरमे पर सफेद मक्खी तो धान के भाव न मिलने से किसानों पर कर्ज बढ़ गया। मंडी के व्यापारी इस बात को स्वीकारते हैं कि अधिकांश किसानों ने फसल से ज्यादा पैसे आढ़ती से ले रखे हैं। दिवाली से पहले परमल धान के रेट को लेकर संशय की स्थिति थी, लेकिन अनुकूल मौसम ने किसानों का साथ दिया।
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इस बार परमल धान का औसत उत्पादन 80 मन प्रति एकड़ से अधिक ज्यादा निकला है। सरकार ने इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 1510 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया। अब बासमती के भाव में एकाएक तेजी आई। शनिवार को तो बासमती 1121 किस्म का धान 2510 रुपये प्रति क्विंटल एवं मुच्छल बासमती किस्म का धान 2600 रुपये प्रति क्विंटल से भी अधिक के भाव बिका। अनुमान के अनुसार बासमती का उत्पादन 45 से 50 मन प्रति एकड़ हो रहा है। परमल और बासमती दोनों ही किसान को करीब 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का लाभ दे रहे हैं।

तीन साल पहले ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचे थे रेट, जिले में इस बार बढ़ा रकबा
 तीन वर्ष पूर्व 1121 एवं मुच्छल धान के करीब 3500 से लेकर 5000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे। तबसे किसानों ने धान की पैदावार की ओर ज्यादा रुख किया। फतेहाबाद में तीन वर्ष पूर्व 70 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती होती थी। लेकिन इस बार ये आंकड़ा बढ़कर एक लाख 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर पहुंच गया। इसके अलावा एक और सबसे खास बात ये है कि इस बार औसत उत्पादन भी बढ़ा है। जिससे कृषि विभाग, व्यापारी और किसान तीनों ही खुश हैं।

जिले का बासमती धान विदेशों में प्रचलित
 बासमती और परमल धान दोनों के उत्पादन एवं भाव का औसत लगाएं तो दोनों ही किस्मों ने किसान को प्रति एकड़ 45 से 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मिल रहा है। हालांकि परमल का उत्पादन 80 से 100 मन एवं बासमती का उत्पादन लगभग इससे आधा ही होता है। बासमती 45 से 50 मन प्रति एकड़ उत्पादन हुआ है। लेकिन मंडी में पिछले साल से इस बार धान की आवक दो लाख 16 हजार मीट्रिक टन धान की आवक ज्यादा हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार किसानों ने धान की परमल किस्म की बिजाई पर बल दिया क्योंकि परमल धान को किसान पक्की फसल एवं सरकारी खरीद वाली नकदी फसल के रूप में जानते हैं। फतेहाबाद का बासमती धान देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी खूब प्रचलित है। फतेहाबाद बासमती धान का चावल, यहां के खाड़ी देशों में जाता है। फतेहाबाद की दो फर्में निर्यात भी करती हैं।   

परमल पर ज्यादा रुझान दिखाया किसानों ने
गांव बीघड़ के किसान कमल मेहता के अनुसार इस बार परमल की बिजाई ज्यादा हुई है। परमल धान की पैदावार बासमती की वेरायटी से डेढ़ गुना अधिक होती है। पिछली बार बासमती के रेट कम होने से इस बार किसानों ने बासमती की बजाए परमल की बिजाई पर ज्यादा ध्यान दिया। परमल प्रति एकड़ 75 से 100 मन जबकि बासमती 45 मन प्रति एकड़ ही हो पाता है।
गांव हड़ौली के किसान आत्मप्रकाश बतरा ने बताया कि परमल पर खर्च कम आता है। बीमारी भी कम लगती है। सरकारी खरीद होने के कारण परमल हाथोंहाथ बिक जाती है जबकि बासमती के भाव बाजार पर निर्भर हैं। यहीं कारण हैं कि किसानों ने इस बार परमल पर ज्यादा जोर दिया।

अच्छे बीज का किया इस्तेमाल
 कृषि उपनिदेशक बलवंत सिंह सहारण ने कहा कि किसानों ने अच्छे बीज का इस्तेमाल किया और बीमारी न लगने से पैदावार बंपर हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगर किसान कृषि विभाग के अनुसार खेती करता है तो धान का उत्पादन और बढ़ सकता है। अनाज मंडी के व्यापारी अरुण ग्रोवर के अनुसार इस बार धान ने किसान को थोड़ा बहुत सहारा लगाया है। अब किसान का कर्ज कम होने लगा है।
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तीन लाख मीट्रिक टन अधिक हुई धान की खरीद : मल्हान
खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक केके मल्हान ने कहा कि पिछली बार चार लाख 46 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। इस बार छह लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का लक्ष्य था लेकिन अब तक छह लाख 90 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है। उनके अनुसार अबकी बार 40 फीसदी धान की आवक ज्यादा है।
 
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