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बिना पानी सूख रही किसानों की मेहनत

Wed, 16 Jul 2014 11:09 PM IST
fatehabad
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जिले में अगर जल्द बरसात न हुई तो किसानाें को भारी नुकसान होगा। सिंचाई के लिए न केवल किसान, बल्कि नहर विभाग भी बारिश की आस में बैठा है। दरअसल, नहरी पानी से भी सिंचाई की पूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में कई किसान तो नहरी पानी की चोरी करने लगे हैं। नहर विभाग का मानना है कि अगर किसान पानी की चोरी न करें तो सभी जगह नहरी पानी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त है।
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धान की फसल को 24 घंटे पानी की जरूरत होती है। किसान धान की रोपाई भी पानी में ही करता है। इसके बाद तब तक इसमें पानी खड़ा रखा जाता है, जब तक फसल पक न जाए। ऐसे में धान की फसल को भरपूर पानी की आवश्यकता होती है। अगर किसी भी स्तर पर पानी कम हुआ तो फसल को नुकसान की संभावना रहती है। किसानों ने इस उम्मीद पर धान की फसल तो लगा दी कि जुलाई के मध्य तक मानसून आ जाएगा, लेकिन अब जबकि सावन माह में भी बरसात नहीं हुई है तो किसान चिंतित हैं। चिंता का बड़ा कारण यह है कि नहरी पानी भी किसानों को नहीं मिल पा रहा। किसान अपने खेत में पानी की पूर्ति करने के लिए नहर में से पानी चोरी कर रहे है। इस कारण पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है। टेल के किसान सिंचाई के लिए केवल बारिश पर ही निर्भर है।
नहर पर पाइप डालकर होती है चोरी
हर किसान यह चाहता है कि उसकी फसल पानी की कमी से न सूखे, ऐसे मेें वह अपने खेत में अतिरिक्त पानी चाहता है। इसके लिए किसान नहर में मोटी पाइप डालकर अपने खेतों छोड़ देते हैं, जिससे पानी की चोरी होती है और आगे टेल तक पानी नहीं पहुंच पाता है। आगे का किसान पानी के इंतजार में रह जाता है।
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एक महीने में 25 किसानों पर मामले दर्ज
धांगड़ डिवीजन के तहत आने वाली कोई भी नहर ऐसी नहीं है, जहां पर पानी चोरी नहीं हो रहा है। धान के सीजन में पानी की मांग बढ़ जाती है और पानी चोरी की घटनाएं भी बढ़ने लगती हैं। नहर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एक महीने के अंदर 25 किसानों को पानी चोरी करते पकड़ा गया है, जिन पर मामले भी दर्ज करवाए गए हैं।
15 दिन आता है नहर में पानी
धांगड डिवीजन के तहत आने वाली नहरों में 15 दिन पानी आता है। इन नहरों में मुंशीवाला माइनर, महम्मदपुर रोही माइनर, भिरड़ाना, बीघड़, धांगड़ माइनर शामिल है। वैसे तो नहरी विभाग ने रकबे के हिसाब से किसानों को पानी देने के लिए समय बांट रखा है, लेकिन पानी आने के बाद किसानाें में पानी लगाने की होड़ लग जाती है।

ऐसे में कहां जाएं किसान
गांव दौलतपुर निवासी रामकुमार ने बताया कि नहरों में पानी नहीं है और ट्यूबवेल चलाने के लिए बिजली नहीं है। ऐसे में वे कहां जाएं। उनकी फसल सूखने लगी है। गांव के ही किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने इसी वजह से तीन दिन पहले रोड जाम किया था। नहरों से पानी चोरी हो रहा है, जिस वजह से पानी टेल तक नहीं पहुंच पाता है।

क्या कहते है अधिकारी
नहरी विभाग के एसडीओ राजेंद्र वर्मा ने कहा कि पानी की कोई कमी नहीं है। पानी के संकट के लिए किसान स्वयं जिम्मेदार हैं। विभाग के अधिकारी भी नहरी पानी चोरी रोकने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जो किसान पानी चोरी करते हुए पकड़ा जाता है, उस पर 30 गुणा जुर्माना लगाया जाता है और पुलिस में केस दर्ज करवाया जाता है। यदि पानी चोरी का यही हाल रहा तो नहरों में पानी की कमी हो जाएगी और सभी किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ेगा।

पीने के पानी को लेकर भी है गंभीर समस्या
शहर में पीने के पानी की भी गंभीर समस्या बनी है। ट्यूबवेलों में पानी का लेवल नीचे जाने के कारण पानी की सप्लाई सही नहीं हो पा रही है। शहर के कई हिस्सों में अभी तक नहरी पानी भी नहीं पहुंचा है।

क्या कहता है जनस्वास्थ्य विभाग
जनस्वास्थय विभाग के एसडीओ ओमप्रकाश ने बताया कि शहर के कई ट्यूबवेलों का जलस्तर नीचे चला गया है, जिस कारण से पानी की समस्या आ रही है। जिन ट्यूबवेलों का जलस्तर नीचे गया है, उनमें अतिरिक्त पाइप डाली जा रही है। उन्होंने बताया कि शहर की जनसंख्या के हिसाब से नहरी पानी का 21 दिन का स्टॉक रखा जाता है।
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