फतेहाबाद। जिले में रबी की फसलों, गेहूं और सरसों की बिजाई के समय किसान डीएपी खाद की किल्लत से परेशान हैं। खाद केंद्रों व निजी दुकानों पर डीएपी खाद उपलब्ध नहीं है, जिससे किसानों को मजबूरन इसके विकल्प के तौर पर एनपीके, टीएसपी और अन्य महंगे उर्वरक खरीदने पड़ रहे हैं।
डीएपी के मुकाबले इनकी अधिक कीमत होने के कारण पहले से ही आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। किसानों पर अब अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। जिले में रबी के सीजन में कुल डीएपी की मांग करीब 25000 मीट्रिक टन है, आपूर्ति 10000 हजार मीट्रिक टन हुई है। रबी का सीजन एक अक्तूबर से लेकर 31 मार्च तक माना जाता है। ऐसे में जिले में सरसों की बिजाई का काम शुरू हो चुका है।
वहीं 10 दिन के बाद गेहूं की बिजाई का काम भी शुरू होगा। ऐसे में अब किसानों को फसलों की बिजाई के लिए डीएपी खाद की आवश्यकता है, लेकिन यह उपलब्ध नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसान कई वर्षों से इसका प्रयोग कर रहे हैं, ऐसे में वे अन्य खाद पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
जिले में रबी के सीजन में कुल डीएपी की मांग 25 हजार मीट्रिक टन है, जिसमें से 10 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की मांग ही पूरी हो सकी है। अभी तक मात्र 40 फीसदी मांग पूरी हुई है और 60 फीसदी की आपूर्ति होनी बाकी है।
किसान चांदी राम लोटासरा, जगदीप गोदारा, रामलाल दहिया और प्रवीण कुमार आदि का कहना है कि जहां एक तरफ उन्हें खेत में बिजाई का कार्य समय पर करना है, वहीं दूसरी तरफ डीएपी न मिलने से उनके सामने फसल की पैदावार प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। किसान मजबूरन ऊंचे दामों पर एनपीके और अन्य मिश्रित खाद खरीद रहे हैं। एनपीके 1750 रुपये प्रति बैग है वहीं डीएपी खाद 1350 रुपये प्रति बैग है।
ऐसे विकल्प डीएपी की तुलना में अन्य खाद काफी महंगे हैं, जिससे प्रति एकड़ खेती की लागत में 500 रुपये तक की वृद्धि हो रही है। खाद की किल्लत को लेकर किसान संगठन लगातार प्रशासन और सरकार से जिले में तुरंत पर्याप्त मात्रा में डीएपी खाद उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि 15 नवंबर तक खाद उपलब्ध नहीं करवाई गई तो किसान बिजाई करने से वंचित रह जांएगे। इससे सीजन में गेहूं और सरसों की पैदावार भी प्रभावित हो सकती है।
:: रबी की फसलों की बुवाई का समय शुरू हुआ है। बिजाई के समय किसानों को खाद उपलब्ध करवाई जाएगी। किसानों को खाद की किल्लत नहीं होगी।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।