फतेहाबाद। जिले में खरीफ फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है और किसान नरमा, बाजरा, मूंग और धान जैसी फसलें अनाज मंडियों में लेकर पहुंचने लगे हैं। दूसरी मंडियों में इन फसलों के उचित भाव न मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम भाव मिलने के कारण किसानों को अपनी लागत भी निकालना मुश्किल हो रहा है। पुरानी अनाज मंडी में नरमा की फसल 6200 से 6400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है, जबकि इसका सरकारी एमएसपी 7710 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। यानी किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 1200 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
मंडी में पहुंचे किसानों का कहना है कि नरमा चुगाई का खर्च ही करीब 2000 रुपये प्रति क्विंटल है। इस हिसाब से अगर 6200 का भाव मिले, तो किसान के हाथ में केवल 4000 रुपये प्रति क्विंटल ही बचते हैं। वहीं दूसरी ओर, इस बार अधिक बारिश के चलते फसल की पैदावार भी प्रभावित हुई है।
किसानों ने बताया कि नरमे की प्रति एकड़ औसत उपज सिर्फ तीन से चार क्विंटल रह गई है, जो सामान्य से 60 प्रतिशत कम है। इस तरह उन्हें प्रति एकड़ केवल 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जबकि लागत कहीं अधिक बैठ रही है। मूंग और बाजरा की फसलें भी एमएसपी से कम भाव पर बिक रही हैं।
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नरमा का कम भाव व कम पैदावार से फसलों पर हुआ खर्च भी नहीं निकल पा रहे हैं। मेरी नरमा का भाव 6330 रुपये प्रति क्विंटल लगा है। आगे की फसल की बुवाई के खाद और बीज खरीदना है, जिससे मजबूरी में फसल बेचनी पड़ रही है।
-हरदीप सिंह, किसान, गांव खुनन।
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मेरी नरमा की फसल 6200 रुपये प्रति क्विंटल पर बिकी है। इस बार बारिश अधिक होने के कारण पैदावार कम है। पहले प्रति एकड़ में 8 से 10 क्विंटल नरमा की पैदावार होती थी, लेकिन इस बार मात्र 3 क्विंटल तक है। नरमे के एकड़ में कुल खर्च 15 हजार तक होता है। ऐसे में फसल पर हुआ खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
-बलदेव सिंह, किसान, गांव सरदुलगढ़।
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मेरी नरमे का भाव का 6100 रुपये प्रति क्विंटल लगा है। भाव कम लगने पर फसल वापस घर ले जा रहा हूं। सरकार को एमएसपी की खरीद शुरू करवानी चाहिए। ताकि किसानों को कुछ लाभ मिल सके। जिससे उनके हुए नुकसान की भरपाई कुछ हद तक हो सके।
-अमित कुमार, किसान गांव मताना।
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मंडी में उचित भाव न मिलने से किसान बिना फसल बिक्री के घर लौट रहे हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ कम पैदावार और दूसरी तरफ मंडी में फसलों का उचित मूल्य न मिलना। इसके बावजूद भी सरकार अपने आप को किसान हितैषी बता रही है।
-मंदीप नथवान, जिला प्रधान, पगड़ी संभाल जट्टा किसान संंघर्ष समिति, फतेहाबाद।
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:: जिन किसानों ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पर नरमा की फसल को पंजीकृत करवाया है वे एक अक्तूबर से एमएसपी पर बेच सकेंगे।
-यशपाल, सचिव अनाज मंडी, फतेहाबाद।