मानसून की बेरुखी के कारण किसानों के माथे पर हताशा की लकीरें अभी से दिखनी शुरू हो गई हैं। क्योंकि पिछले एक माह से भी अधिक समय से बारिश नहीं हुई है।
अब आलम यह है कि खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं, जमीनें दरकने लगी हैं। बारिश न होने से गांव नागपुर, दादूपुर, ढ़ाबी कलां, भट्टूकलां के दैयड़ व रतिया क्षेत्र के गाव भरपूर, दीवाना सहित अन्य गांवों की जमीनों के हालात अब दिन ब दिन बिगड़ने शुरू हो गए हैं। किसानों का कहना है कि अगर अगले दो चार दिनों में बारिश नहीं हुई तो हमारे लिए संकट के दिन खड़े हो जाएंगे।
अगस्त में हुई आठ एमएम की बारिश
इस साल जिले में 98 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान तथा 78 हजार हेक्टेयर भूमि पर नरमे की बिजाई की गई थी। धान उत्पादक किसानों ने जुलाई के प्रथम सप्ताह में धान की बिजाई की थी।
प्री मानसून बरसात में तो किसानों की बांछें खिली हुई थी, क्योंकि जुलाई में बारिश हुई थी, लेकिन अगस्त में आठ एमएम की बारिश ने पूरा खेल ही बिगाड़ दिया। हालांकि फतेहाबाद में किसानों ने ट्यूबवेल से सिंचाई हो सकता है, लेकिन टोहाना व रतिया में भूजल स्तर काफी नीचे है।
जिस कारण ट्यूबवेल चलाने में काफी खर्चा आता है ऐसे में किसान क्या करें। गांव भरपूर के किसान जसवंत व बहादुर ने बताया की यही हालात रहे तो किसानों की बर्बादी तय है। किसान रामस्वरूप ने बताया कि इस बार मानसून ने हमें निराश किया है। हमारी फसलें सूख रही हैं। वही सब्जियों की फसल को भी पानी की कमी के चलते नुकसान हो रहा है। किसानों ने बताया कि धान की फसल पूरी तरह से सूख चुकी है और जमीन बंजर की भांति दिखाई देने लगी है।
क्या कहना है कृषि अधिकारियों का
कृषि विभाग के खंड कृषि अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि बारिश की कमी के चलते जमीन सूखने लगी हैं जिससे फसल खराब होने कगार पर हैं।
यही हाल रहा तो किसानों को इस बार फसल के लिए नुकसान उठाना पड़ सकता है। आज ही गांव हुक्मावाली, दादुपुर व भरपूर सहित कुछ अन्य गांवों में कुछ किसानों की जमीन में दरारें आने की बात सामने आई है व वह सोमवार को जाकर इन गांवों का मुआयना करेंगे।
सफेद मक्खी से हो रही है नरमे की फसल बर्बाद
जिले में इस बार बरसात की कमी के कारण नरमे की फसल पर सफेद मक्खी का प्रकोप है और सफेद मक्खी से नरमे की फसल बर्बाद हो रही है।
जल्दी बरसात न हुई तो व्हाइट फ्लाई से नरमे की फसल को नुकसान ज्यादा हो सकता है। सहायक कृषि उपनिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि सफेद मक्खी नरमे का रस चूसती है। जिसके बाद पते काले पड़ने शुरू हो जाते हैं और बाद में पता नीचे गिर जाता है।
जिले मे कुल जमीन का क्षेत्रफल- 2 लाख 52 हजार हेक्टेयर
कृषि योग्य भूमि 2 लाख 13 हजार
नरमा बिजाई 78 हजार हेक्टेयर
धान बिजाई 98 हजार हेक्टेयर
वर्ष 2012 में हुई बारिश - 486 एमएम
वर्ष 2013 में हुई बारिश- 922 एमएम
वर्ष 2014 में हुई बारिश- 497 एमएम
वर्ष 2015 में अब तक- 450 एमएम
कृषि व राजस्व विभाग के अनुसार 450 एमएम में से अधिकांश टोहाना व रतिया मे हुई है तथा फतेहाबाद में औसतन इससे आधी बरसात हुई है।