फतेहाबाद। शिशुओं के लिए जानलेवा बीमारियों में निमोनिया भी शामिल है। अगर समय रहते बच्चे का उपचार नहीं करवाया तो उसके लिए खतरनाक हो सकता है। ठंड बढ़ने के साथ शिशुओं में निमोनिया होने की संभावना अधिक रहती है। अभी फिलहाल सरकारी अस्पताल की ओपीडी में रोजाना दो से तीन केस निमोनिया पीड़ित बच्चों के आ रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि ठंड बढ़ने पर निमोनिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ जाती है। निमोनिया छींकने या खांसने से फैलने वाला संक्रामक रोग है, इसलिए शिशुओं की विशेष देखभाल आवश्यक है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की माने तो एक हजार के पीछे करीब सात बच्चों की मौत निमोनिया के कारण हर साल हो जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक इस गंभीर रोग को टीकाकरण से पूरी तरह से रोका जा सकता है इसलिए बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण करवाएं। न्यूमोकॉकल कंजूगेट वैक्सीन का टीका शिशु को दो माह, चार माह, छह माह, 12 माह और 15 माह पर लगाने होते हैं। ये टीका बच्चे को निमोनिया से बचाता है।
पांच साल से कम बच्चों में ज्यादा खतरा
चिकित्सकों के मुताबिक पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का खतरा ज्यादा रहता है। इसका मुख्य कारण कुपोषण और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता भी है। यह रोग बैक्टीरिया, वायरस फेफड़ों में संक्रमण से होता है। फेफड़ों में संक्रमण होने से सूजन पैदा हो जाती है जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है।
लक्षण
सूखी खांसी आना
सांस लेने की गति बढ़ जाना
पीठ के बल लेटने में दिक्कत होना
तेज बुखार, पसीना आना, अधिक पेशाब आना
छाती में दर्द, सिरदर्द
प्यास अधिक लगना
फेफड़ों में सूजन आना
कोट
निमोनिया के अभी ओपीडी में कम केस आ रहे है। ये रोग फेफड़ों में संक्रमण के कारण होता है। ठंड में बच्चों में निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है। सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है।
- डॉ. वरुण मुंजाल, शिशु रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल