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कोरोना काल में 9 बच्चों ने मां-बाप को खोया, 120 ऐसे जिनके सिर से एक का साया हटा

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कोरोना महामारी ऐसा रूप लेकर आई कई बच्चों को बेसहारा बना दिया। ये ही नहीं कई बच्चों से उनके मां-बाप में से एक को छीन लिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के सर्वे में सामने आया है कि कोरोना काल के दौरान 9 बच्चे ऐसे हैं जिनके मां-बाप दोनों की ही मौत हो गई है। इसके अलावा 120 बच्चे ऐसे हैं जिनके सिर से मां या बाप में से एक का हाथ उठ चुका है। आंगनबाड़ी वर्कर्स से रिपोर्ट आने के बाद जिला बाल संरक्षण विभाग ने बाल स्वराज पोर्टल पर सर्वे रिपोर्ट भेज दी है।
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सरकार ने मार्च 2020 से लेकर मई 2021 तक ऐसे मामलों की रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें कोरोना काल के दौरान बच्चों के मां-बाप की मौत हो चुकी है या फिर दोनों में से एक की मौत हुई है। रिपोर्ट आने के बाद बाल संरक्षण विभाग शुक्रवार से इन बच्चों की काउंसलिंग शुरू करने जा रहा है। इसके अलावा मां-बाप की मौत का क्या कारण रहा उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी। संवाद
बच्चे को प्राथमिकता अनुसार मिलेगा संरक्षण
कोरोना काल के दौरान मां-बाप को खो चुके बच्चों की जिला बाल संरक्षण विभाग काउंसलिंग करेगा। इस दौरान पता लगाया जाएगा कि बच्चों को फिलहाल कौन संरक्षण दे रहा है। अगर बच्चों को कोई संरक्षण नहीं मिल रहा है तो बाल संरक्षण विभाग प्राथमिकता अनुसार बच्चों को संरक्षण देगा।
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मई में चार गुना ज्यादा जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्र
मई माह में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं। फतेहाबाद शहर की अगर बात की जाए तो चार गुना ज्यादा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए हैं। इस साल जनवरी और फरवरी माह में 49-49, मार्च में 44, अप्रैल में 59 तथा मई में 196 मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के जारी किए मृत्यु प्रमाण पत्र
वर्ष पुरुष महिला
2019 3810 2306
2020 4034 2517
2021 (अप्रैल तक) 1294 848
फतेहाबाद शहर के जारी हुए मृत्यु प्रमाण पत्र
वर्ष पुरुष महिला
2020 338 195
2021 (अप्रैल तक) 124 77
जिले में कोरोना संक्रमितों की हुई मौत
2020 : 116
2021 : 309
सूचना फार्म में मौत का कारण दर्ज लेकिन प्रमाण पत्र पर नहीं
मृत्यु प्रमाण पत्र पर मौत का कारण दर्ज नहीं हो रहा है। मौत किन कारणों से हुई ये नहीं बताया जा रहा है। जबकि सूचना फार्म पर मौत का कारण दर्ज है। ऐसे में मृत्यु प्रमाण पत्र के द्वारा ये नहीं पता चल पाएगा कि मौत कोरोना के कारण हुई है या अन्य कारणों से हुई है। स्वास्थ्य विभाग जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड शाखा के नोडल अधिकारी सुरजीत का कहना है कि सूचना फार्म में पूरा रिकॉर्ड दर्ज होता है लेकिन जब मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होता है तो उस पर दर्ज नहीं किया जाता है। सूचना फार्म को सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक सार्वजनिक भी नहीं किया जा सकता है।
कोट
आंगनबाड़ी वर्कर्स द्वारा सर्वे किया गया है। 129 बच्चे सामने आए हैं। 9 बच्चे ऐसे हैं जिनके कोरोना काल के दौरान मां-बाप दोनों की ही मौत हो चुकी है। इसके अलावा 120 बच्चे ऐसे हैं जिनके परिवार में मां-बाप में से एक ही बचा है। शुक्रवार से काउंसलिंग शुरू की जाएगी। मौत के कारण का पता लगाया जाएगा। बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी कि वह किसके साथ कैसे रहना चाहते हैं। सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक लाभ जारी कर दिया जाएगा।
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- सुरजीत बाजिया, बाल संरक्षण अधिकारी।
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