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Fatehabad News: छह दिनों से प्रदूषित हवा में सांस ले रहे जिलावासी, सुबह सैर न करने की सलाह

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फतेहाबाद के कुलां क्षेत्र में जलती पराली से उठता धुआं आसमान में जाता हुआ।
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फतेहाबाद। पराली जलने के मामलों में आई तेजी के कारण फतेहाबाद जिले के लोग पिछले छह दिनों से दमघोंटू हवा के बीच जीने को मजबूर हैं। इन दिनों में एक्यूआई का स्तर 400 के पार ही रहा रहा है। वहीं प्रदूषण से राहत के लिए प्रशासन शाम को पानी का छिड़काव भी करा रहा है। सुबह व शाम को आसमान पूरी तरह से धुएं से घिर जाता है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को सुबह की सैर करने की भी सलाह दी है। सोमवार को भी फतेहाबाद जिले में 21 स्थानों पर पराली जलने की सूचना कृषि विभाग को मिली।
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फतेहाबाद में वातावरण पूरी तरह से प्रदूषित चल रहा है। कृषि विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद भी किसान पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। फतेहाबाद में सोमवार को भी एक्यूआई का अधिकतम स्तर 445 रहा। जिस कारण दमघोंटू हवा के बीच लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। जिले में दोपहर 12 बजे एक्यूआई का स्तर 417 थार 414, तीन बजे 445, चार बजे 422 व पांच बजे 425 आंका गया। छह दिनों से एक्यूआई के 400 के पार चलने और आसमान में धुआं भरा रहने के कारण लोगों को सांस लेने में तकलीफ आने लगी है। कई लोगों को चक्कर आने की शिकायत आ रही है।


सोमवार को भी 21 स्थानों पर जली पराली
फतेहाबाद में सोमवार को भी 21 स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। अब तक जिले में पराली जलाने के 317 मामले सामने आ चुके हैं। ज्ञात रहे कि रविवार को जिले में अब तक की सबसे अधिक 36 स्थानों पर पराली जली थी। कृषि विभाग 153 किसानों को अब तक तीन लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना ठोक चुका है।
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स्वास्थ्य विभाग ने दीं ये हिदायतें
1. जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलें।
2. आंखों में जलन, सांस की तकलीफ या खांसी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
3. दिल, फेफड़े व अन्य गंभीर बीमारी के रोगियों का विशेष ध्यान दें।
4. धुआं रहित ईंधन का प्रयोग करें।
5 .सुबह व शाम के समय घराें के दरवाजे बंद रखें।
6. सुबह व शाम की सैर को टालें।
7. पटाखे, कूड़ा व पतियां आदि न जलाएं और धूम्रपान से परहेज करें।

प्रदूषण से स्वास्थ्य पर हो सकता है यह असर
1. चक्कर आना
2. सांस लेने में तकलीफ
3. खांसी
4. छाती में तकलीफ
5. आंखों में जलन
कोट

बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग बीमार हो सकते हैं। सांस की तकलीफ बढ़ सकती है और दमा रोगियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जितना हो सके घरों में ही रहें और दमा के मरीजों का विशेष ध्यान रखें। बाहर निकलते समय मास्क व चश्मे का प्रयोग अवश्य करें।
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-डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ।
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