फतेहाबाद। रक्षाबंधन पर निशुल्क यात्रा का लाभ लेना महिलाओं के लिए आसान नहीं रहा। महिलाओं को पहले दिन ही मुश्किलों से जूझना पड़ा। दोपहर 12 बजे के बाद रोडवेज की बसों में भीड़ बढ़ गई। इससे महिलाओं को सीटें नहीं मिली और उन्हें पूरे रास्ते खड़े होकर ही यात्रा करनी पड़ी। ग्रामीण रूटों पर महिलाओं ने सबसे अधिक परेशानी झेली। एक बस में सवार महिला बोली सरकार ने लुगाइयां खातर सफर तो फ्री कर दिया, लेकिन बस में सीट तो खाली कोनी, खड़े होकै आणा पड्या। बस जमा फुल हो री सै।
रामप्यारी, यात्री, टोहाना रूट
रोडवेज प्रशासन भी कम संसाधनों के कारण बेबस नजर आया। ग्रामीण रूटों के लिए मात्र 60 बसें ही चली। दिल्ली-चंडीगढ़ रूट पर जाने वाली बसों में भी भीड़ बढ़ने से महिलाओं के अलावा पुरुषों का भी सफर मुश्किल हो गया। कोविड-19 संबंधी नियमों की भी धज्जियां उड़ती रही।
25 बसें जा रही चंडीगढ़-दिल्ली रूट पर
दरअसल, रोडवेज प्रशासन के पास 108 बसें हैं। इनमें से 85 बसें ही ऑन रूट हैं। इनमें से भी 25 बसें दिल्ली और चंडीगढ़ के लंबे रूट पर चलाई जा रही हैं। शेष 60 बसों को ग्रामीण रूटों पर लगाया हुआ है। हालांकि, रोडवेज अधिकारियों ने ड्यूटी सेक्शन व बस स्टैंड पर तैनात कर्मचारियों को आदेश दिए हुए थे, कि जिन रूटों पर अधिक सवारियां मिलें, वहां बसों के फेरे बढ़ाए जाएं। मगर पहले दिन ऐसा कोई रूट नहीं रहा, जहां बसों के फेरों की संख्या बढ़ाई गई हो।
अधिकारियों का रहा एक ही लक्ष्य, बस स्टैंड पर भीड़ न होने देना
संस्थान प्रबंधक व बस स्टैंड पर कार्यरत अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों का बस स्टैंड पर भीड़ नहीं होने देना ही लक्ष्य रहा। इसलिए सभी बसों को निर्धारित समय से एक मिनट भी देरी से नहीं चलने दिया गया। बस में चढ़ने के दौरान भी भीड़ एकत्रित होने लगती तो तुरंत कर्मचारी वहां आकर जल्दी-जल्दी सवारियों को बसों में चढ़ने के निर्देश देते रहे।
निजी वाहनों को रोकने के लिए लगाया कर्मचारी
अनावश्यक रूप से निजी वाहनों को बस स्टैंड परिसर में जाने से रोकने के लिए अधिकारियों ने मंदिर परिसर के साथ बने गेट पर कर्मचारी तैनात कर दिया। कर्मचारी ने किसी भी निजी वाहन को अंदर नहीं जाने दिया। इससे बसों के आगे वाहन लगने से उनको निकलने में परेशानी नहीं हुई।
पहले दिन पांच हजार से अधिक महिलाओं ने किया सफर
रोडवेज अधिकारियों के अनुसार पहले दिन रोडवेज की बसों में पांच हजार से अधिक महिलाओं ने मुफ्त सफर किया है। करीब एक हजार 15 साल से छोटे बच्चों ने भी रोडवेज बसों में महिलाओं के साथ यात्रा की।
ग्रामीण रूटों पर 47 निजी बसें भी चली
रोडवेज बसों के अलावा चार प्रमुख रूटों पर 47 निजी बसों का भी परिचालन हुआ। हालांकि, यह सुविधा हर रूट पर महिलाओं को उपलब्ध नहीं हो सकी। सरकार के निर्देशों के अनुसार प्राइवेट बसों में भी महिलाओं को मुफ्त सफर की छूट दी गई। संस्थान प्रबंधक के पास प्राइवेट बसों में महिलाओं से किराया लेने संबंधी कोई शिकायत नहीं आई।
महिलाओं के लिए निशुल्क सफर की घोषणा तो अच्छी है। मगर भीड़ के मुकाबले बसों की संख्या तो नाममात्र है। इस कारण महिलाओं को सफर में सीट तक नहीं मिली।
-सरोज रानी, यात्री, हिसार रूट
लुगाइंया खातर सफर तो मुफ्त कर दिया, पर बस तो पूरी कोन्या। सीट भी मिली कोनी। सारे रास्तै खड़ी होकै आणा पड्या। बस जमा फुल हो सै।
-रामप्यारी, यात्री, टोहाना रूट
सरकार को ग्रामीण रूटों पर बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। मैं अपने 10 साल के बच्चे के साथ मायके आई हूं। भीड़ इतनी थी कि खड़े होने के लिए भी जगह नहीं मिल रही थी।
-सुमन रानी, यात्री, सिरसा रूट
टोहाना सब डिपो में छह अतिरिक्त बसें लगाई
सब डिपो की 40 बसें ऑन रूट नियमित चल रही हैं। रक्षाबंधन के पर्व को देखते हुए छह अतिरिक्त बसें लगा दी गई हैं। आठ चालक व परिचालकों को भी अतिरिक्त तौर पर बुलाया गया है।
- सुरेश दहिया, ड्यूटी इंस्पेक्टर, टोहाना सब डिपो
बस स्टैंड पर बिल्कुल भीड़ नहीं होने दी गई। समय पर सभी बसों में सवारियों को भेजा गया है। पहले दिन पांच हजार से ज्यादा महिला यात्रियों ने सफर किया है। रविवार को भी पूरी मुस्तैदी से रोडवेज कर्मचारी ड्यूटी करेंगे।
-मनफूल सिंह, संस्थान प्रबंधक, फतेहाबाद डिपो
सीट के अभाव में बस में खड़े होकर सफर करती महिला यात्री।- फोटो : Fatehabad