आंकड़ों का देश की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए अधिकारी-कर्मचारी सही आंकड़े एकत्रित कर समाज और राष्ट्र के नव निर्माण में योगदान दें। यह बात उपायुक्त एनके सोलंकी ने राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस समारोह में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों से कही।
सोलंकी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा प्रो. प्रशांत चंद्रा के जन्म दिवस पर उनके सांख्यिकी एवं आर्थिक योजना के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के कारण 29 जून 2007 को सांख्यिकी दिवस मनाने की शुरुआत की गई, जो सराहनीय कदम है। विभिन्न प्रकार की जन कल्याणकारी योजनाओं के लिए आंकड़ों की जरूरत पड़ती है। सही और पूर्ण आंकड़ों के कारण की विभिन्न योजनाएं सफल हो पाती है।
उन्होंने कहा कि आंकड़ों का देश की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण स्थान रहता है। इस अवसर पर प्रत्येक वर्ष एक विशेष थीम लिया जाता है। इस वर्ष के सांख्यिकी दिवस का थीम एग्रीकल्चर एंड फार्मर्स वेलफेयर है। उन्होंने कहा कि भारत की 58 प्रतिशत से अधिक आबादी के लिए कृषि अजीविका का मुख्य साधन है। कृषि क्षेत्र से ही गैर कृषि क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्र के विकास में कृषि क्षेत्र के महत्व को देखते हुए किसानों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है।
प्रो. प्रशांत चंद्रा के बारे में जानकारी देते हुए सोलंकी ने कहा कि वे एक प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक एवं सांख्यिकीविद् थे। उनका जन्म 29 जून 1893 को कोलकाता में हुआ। उन्हें दूसरी पंचवर्षीय योजना के अपने मसौदे के कारण जाना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की स्वत्रंता के पश्चात नवगठित मंत्रिमंडल के सांख्यिकी सलाहकार बने तथा औद्योगिक उत्पादन की तीव्र बढ़ोतरी के जरिए बेरोजगारी समाप्त करने के सरकार के प्रमुख उद्देश्य को पूरा करने के लिए योजना का खाका खींचा। महालनोबिस की प्रसिद्धि महालनोबिस दूरी के कारण है, जो उनके द्वारा सुझाया गई एक सांख्यिकीय माप है।
उन्होंने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आर्थिक योजना और सांख्यिकी विकास के क्षेत्र में प्रशांत चंद्र महालनोबिस के उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में भारत सरकार उनके जन्मदिन, 29 जून को हर वर्ष सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाती है।