जाखल। शहर से बेसहारा पशुओं को हटाने के लिए नगर पालिका ने करीब डेढ़ महीना पहले सात लाख रुपये का ठेका दिया था, लेकिन यह अभियान सिरे नहीं चढ़ सका। इसका कारण पशुओं को रखने के लिए गोशाला में जगह न मिलना बताया जा रहा है।
नगर पालिका प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को समस्या बताई है। नए शेड बनने पर बेसहारा पशुओं को रखने की व्यवस्था की जाएगी। लोगों का कहना है कि जब गोशाला में पशुओं को रखने की व्यवस्था ही नहीं है तो उससे पहले बेसहारा पशुओं को पकड़ने का ठेका देने का औचित्य नहीं है। इसी कारण लाखों रुपये की निविदा जारी करने के बाद भी शहर के गली मोहल्ले और मुख्य मार्गों पर बेसहारा पशुओं का झुंड दिख रहा है। शहर में इन बेसहारा पशुओं से न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि इससे लोगों की जान पर भी खतरा मंडराता रहता है।
1,400 रुपये प्रति पशु के हिसाब से दिया ठेका
जनता के आक्रोश को देखते हुए नगर पालिका ने पिछले माह एक एजेंसी को पशु पकड़ने का ठेका दिया था। इसके तहत एक बेसहारा पशु पकड़ने पर 1,400 रुपये का भुगतान किया जाना है। इस तरह 500 बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर पालिका ने सात लाख रुपये की निविदा जारी की है, लेकिन पशुओं को रखने के लिए गोशाला में जगह की कमी होने पर कमेटी ने प्रशासन से जगह दिलाने की मांग की। मांग पूरी न होने के कारण उसके बाद पशुओं को पकड़ने पर रोक लगा दी गई है। अधिकारियों ने गोशाला में पशुओं को रखने के लिए शेड बनवाने का आश्वासन दिया है।
लावारिस पशुओं की विकट समस्या
शहरवासी सुरेश कुमार, सूरज, राजकुमार, जोगी, विनोद कुमार आदि ने बताया कि शहर में बेसहारा पशुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर में भारतीय स्टेट बैंक रोड, मार्केट कमेटी, बलरा रोड, नई बस्ती, अनाज मंडी, सहित शहर के वार्डों में बेसहारा पशु झुंड बनाकर बैठे रहते हैं। नई बस्ती के रेलवे रोड पर आपस में भिड़कर पशु लोगों का नुकसान भी कर रहे हैं। इन पशुओं ने कुछ लोगों को चोट भी पहुंचाई है।
- शहर में लावारिस पशु पकड़ने का कार्य दो फरवरी से शुरू हुआ था। इसे 500 पशुओं को पकड़ने और उन पर टैग लगाकर गोशाला तक पहुंचाना है लेकिन यह एजेंसी मात्र 81 पशु पकड़कर गोशाला तक पहुंचा सकी है। अब गोशाला में जगह न मिलने के कारण पशु प्रबंधन कार्य रोक दिया गया है।
- रवि कुमार, जेई, नगर पालिका, जाखल।