फतेहाबाद में बाढ़ ग्रस्त लोगो का चेकअप करते हुए स्वास्थ्यकर्मी
फतेहाबाद। बाढ़ के पानी के चलते स्वास्थ्य विभाग को अब महामारी फैलने का खतरा सताने लगा है। स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर अलर्ट हो गया है और एक माह के लिए रैपिड फीवर सर्वे शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें बाढ़ ग्रस्त गांवों और बिना बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में एक माह तक सर्वे करेंगी। सर्वे में लारवा ढूंढने के साथ-साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी भी कर्मचारियों को दी गई है।
स्वास्थ्यकर्मी डोर-टू-डोर घरों में जाएंगे और वहां पानी की टंकी, कूलर, फ्रिज की ट्रे की जांच करेंगे। लारवा मिलने पर टेमीफोर्स दवाई डालकर नष्ट किया जाएगा। इसके अलावा परिवार में किसी के बुखार होने पर उसकी स्लाइड भी बनाई जाएगी। स्लाइड के जरिये विभाग मलेरिया की जांच करेगा। बाढ़ के चलते दूषित पेयजल की सप्लाई की भी विभाग को आशंका है। इसके चलते स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों और शहरी क्षेत्र में पानी के सैंपल लेंगे। जांच में अगर पानी का सैंपल फेल मिलता है तो जनस्वास्थ्य विभाग को सूचना दी जाएगी। विभाग द्वारा लगाए जा रहे कैंप में अब तक पेट की बीमारी के 514 मरीज मिल चुके है। विभाग अब तक पानी के 431 सैंपल ले चुका है इसमें 27 में क्लोरिन की मात्रा कम मिली है।
बुखार और चर्म रोगी बढ़े
बाढ़ के पानी के चलते बुखार और चर्म रोगी बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 864 कैंप लगाए जा चुके हैं। इसमें 11254 लोगों की जांच हुई है। इसमें बुखार के 1122, चर्म रोग के 2424, आंख संबंधित बीमारी के 365 और अन्य बीमारियों के 6725 मरीज मिल चुके हैं।
कोट
जिले में एक माह के लिए रैपिड फीवर सर्वे शुरू किया गया है। इसको लेकर खंड स्तर पर टीमें बनाई गई है। ये टीमें लारवा ढूंढेगी। बुखार के केस मिलने पर स्लाइड बनाई जाएगी। इसके अलावा टीमें पानी के सैंपल भी लेंगी। लोगों को जागरूक भी करेंगी।
-डॉ. विष्णु मित्तल, जिला महामारी रोकथाम विशेषज्ञ