फतेहाबाद। दीपावली पर्व की रात को किसानों ने खेतों में फसल अवशेष जलाए। इस सीजन में वीरवार रात को सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। हालांकि पिछले सालों के मुकाबले आंकड़ा कम रहा है। दीपावली के दिन सबसे अधिक 7 स्थानों पर फसल अवशेष जलाएं गए हैं।
बता दें कि त्योहार के चलते एक साथ कई सरकारी छुट्टियां होने से अधिकारी निगरानी कर नहीं कर पाएं। जिससे फसल अवशेष जलाने के मामलाें में वृद्धि हुई है। इसका फायदा उठाते हुए किसानों ने पराली जलाई है। शुक्रवार को जिले में अधिकतम एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 185 दर्ज किया गया। बता दें कि इस बार फसल अवशेषों को जलाने से रोकने के लिए सरकार द्वारा किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर कृषि यंत्र वितरित किए गए हैं। इसके अलावा पराली प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक किया था। जिसके कारण फसल अवशेष जलाने के मामलों में कमी दर्ज हुई है।
वहीं सरकार ने सख्ती करते हुए फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज की जा रही है। ऐसे में जिले में वीरवार को फसल अवशेष जलाने के कुल 7 मामले मिले हैं। जिनकी शिकायत पुलिस को दे दी गई है। जिसकी शुक्रवार को जांच के बाद कार्रवाई की गई। इसके रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को दी जाएगी। जिले में 31 अक्तूबर को हरसैक द्वारा 7 लोकेशन भेजी गई है।
पिछले वर्ष दिवाली तक जिले में कुल 207 स्थानों पर फसल अवशेष जलाएं जा चुके थे। वहीं इस बार दिवाली तक जिले में कुल 51 स्थानों पर फसल अवशेष जलाएं जा चुके हैं। जिन पर कार्रवाई करते हुए कृषि विभाग ने 35 किसानों की लाल एंट्री और 12 किसानों पर एफआईआर दर्ज की है।
पिछले साल दिवाली अगले दिन
बता दें कि पिछले साल दिवाली 12 नवंबर को थी। उस दिन जिले में एक्यूआई का स्तर 195 था। दिवाली से अगले दिन यह 314 दर्ज किया गया था। वहीं अबकी बार 31 अक्तूबर को दिवाली वाले दिन एक्यूआई का स्तर का डाटा अपडेट नहीं हो पाया। वहीं शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर शाम 6 बजे तक एक्यूआई 185 दर्ज किया गया।
एयर क्वालिटी इंडेक्स के मानक
0-50 के बीच बेहतर
51-100 के बीच संतोषजनक
101 से 200 के बीच सामान्य
201 से 300 के बीच खराब
301 से 400 के बीच बहुत खराब
401 से 500 के बीच गंभीर
हवा में पीएम 10 का स्तर 100 और पीएम 2.5 60 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए
:: जिले में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों पर निगरानी रखी जा रही है। जिसके कारण पिछले साल की तुलना में इस बार 75 फीसदी कम फसल अवशेष जलाएं गए हैं। किसानों को फसल अवशेष न जलाकर सरकार का पराली प्रबंधन में सहयोग करना चाहिए। जिसके लिए पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1000 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।
-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक एवं कृषि नियंत्रण अधिकारी, फतेहाबाद।