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सेलटैक्स विभाग के साथ किया करोड़ों रूपये का फर्जीवाड़ा, दो कंपनियों के खिलाफ रतिया में दर्ज हुआ मुकदमा

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अमर उजाला ब्यूरो
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फतेहाबाद। जीएसटी में गोलमाल कर सरकार और सेल टैक्स विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के आरोप में दो फर्मों ओसवाल ट्रेडर्स एवं ओंकार ट्रेडिंग कंपनी के खिलाफ रतिया पुलिस ने धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। इस बाबत स्टेट जीएसटी अधिकारी संजय खिचड़ ने औपचारिक शिकायत पुलिस कप्तान को दी थी। इससे पहले बुधवार को भी फतेहाबाद सदर पुलिस ने ऐसे ही एक मामले में फर्जी कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
पुलिस को दी शिकायत में ईटीओ एवं स्टेट जीएसटी ऑफिसर संजय खिचड़ ने बताया कि रतिया की एक फर्म मैसर्ज ओसवाल ट्र्रेडर्स ने दिसंबर 2017 से दिसंबर 2018 तक 196 फर्जी बिलों के जरिये 20 करोड़ 30 लाख की बोगस सेल दिखा दी और 246 फर्जी बिलों के जरिये ही 26 करोड़ से अधिक की खरीद भी कागजों में ही दिखा दी। इतना ही नहीं, इस कंपनी ने इन फर्जी बिलों के सहारे सेल टैक्स विभाग को एक करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान पहुंचाया। ये सारा गोलमाल जीएसटी के बिना किया गया और सेल टैक्स विभाग की जांच में ये मामला उस समय सामने आ गया जब विभाग के अधिकारियों ने कंपनी द्वारा भरी गई फर्जी आनलाइन रिटर्न की जांच की। मामला संदिग्ध लगने पर विभाग की टीमों ने उस स्थान पर छापेमारी का प्रयास किया जहां का पता कंपनी ने अपने कार्यालय व फैक्ट्री प्रांगण के रूप में दिया था। लेकिन उस जगह पर न तो कंपनी का कोई दफ्तर मिला और न ही कोई फैक्ट्री प्रांगण। इतना ही नहीं, कंपनी के कागजों में जिस राजपाल नामक को कंपनी का मालिक बताया गया है, उससे भी विभाग का कोई संपर्क नहीं हो सका।
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दूसरी कंपनी ने ऐसे किया फर्जीवाड़ा
कुछ ऐसा ही कारनामा रतिया की दूसरी बोगस फर्म ओंकार ट्रेडिंग कंपनी ने भी किया है। ओंकार ट्रेडिंग कंपनी के अधिकारियों ने कागजों में ही 357 फर्जी बिलों के सहारे 13 करोड़ से अधिक की सेल दिखा दी और 18 बोगस बिलों पर एक करोड़ 92 लाख रुपये की फर्जी खरीद कागजों में शो कर दी। पुलिस कप्तान को सौंपी गई औपचारिक शिकायत में स्टेट जीएसटी अधिकारी संजय खिचड़ ने आरोप लगाया है कि इस कंपनी ने भी न केवल फर्जी बिलों का सहारा लेकर विभाग के धोखाधड़ी की बल्कि विभाग को 65 लाख रुपये जीएसटी का चूना भी लगा दिया। खिचड़ की मानें इन कंपनियों ने रतिया की ही कई अन्य फर्जी कंपनियों के साथ भी लेन-देन दिखा रखा है जबकि वास्तविकता में बाकी कंपनियां भी फर्जी निकली हैं और उनके खिलाफ पहले ही मामले दर्ज हैं और जांच जारी है। इस बारे में रतिया एसएचओ कपिल सिहाग ने बताया कि जीएसटी अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही आरोपियों को काबू किया जाएगा।
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