शहर की बात करें तो 35 स्थानों से पानी के सैंपल लिए, जिनमें से 24 जगह सैंपल फेल हो गए। इनमें से तीन नमूने ऐसे हैं, जहां पानी को पीने के लिहाज से बेहद ही खतरनाक बताया गया है। मतलब यह कि अगर इन जगहों के पानी को पी लिया जाए तो तबीयत खराब होने की पूरी गारंटी है। लोगों में हड़कंप न मचे, इसके मद्देनजर विभाग इन जगहों का खुलासा करने में से बच रहा है।
इस तरह से लिए गए सैंपल --
शहर में सामान्य अस्पताल के चिकित्सकों और टोहाना, भट्टू, भूना, रतिया, जाखल, कुलां के अंतर्गत आने वाले गांवों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारियों ने पानी के नमूने लिए थे। इन नमूनों को फतेहाबाद के सामान्य अस्पताल में भेजा गया। लैब में इसकी जांच की गई तो 990 सैंपल फेल मिले।
जांच में पाया गया कि पानी में क्लोरीन की मात्रा भी कम है। फतेहाबाद में तीन स्थानों पर पेयजल सप्लाई में सीवरेज का पानी खतरनाक मानक पर मिला। स्वास्थ्य विभाग ने इन नमूनों को विशेष जांच के लिए सिरसा भेजा था। सिरसा लैब की रिपोर्ट के अनुसार इस पानी में इतना अधिक बैक्टीरिया था कि उसे पीने के बाद अस्पताल पहुंचना तय है। इस पीने को जहर के बराबर माना गया है।
पिछले दो माह से नहीं हो रहा पानी साफ --
पानी को साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां और ब्लीचिंग पाउडर डाला जाना चाहिए। क्लोरीन की गोलियां स्वास्थ्य विभाग के पास होती है, जबकि ब्लीचिंग पाउडर और क्लोरीन की गैस जन स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध रहती है। स्वास्थ्य विभाग के पास क्लोरीन की गोलियां हिसार स्वास्थ्य विभाग के वेयर हाउस से आती है। हिसार से पिछले दो माह से क्लोरीन की गोलियां आई ही नहीं हैं। ऐसे में जिन इलाकों में दूषित पेयजल की वजह से बीमारियां फैलती हैं, वहां भी पानी को साफ नहीं कर पा रहे हैं।
यहां छह महीने से आ रहा दूषित पानी --
स्वास्थ्य विभाग भले ही खुलासा न करे, लेकिन लोग अच्छी तरह से जानते हैं कि उनके एरिया में पानी स्वच्छ आ रहा है या दूषित। अशोक नगर, जंडी मोहल्ला, योग नगर, धर्मशाला रोड, ठाकर बस्ती, मस्जिद वाला स्कूल क्षेत्र, रतिया चुंगी, कबीर बस्ती, बीघड़ रोड, लाजपत नगर, चौधरी कॉलोनी, डीसी कॉलोनी, भाटिया नगर, सुभाष कॉलोनी, आजाद नगर और काली दास कॉलोनी में पिछले काफी समय से लोग दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत कर रहे हैं। भाटिया नगर के पार्षद दर्शन नागपाल का कहना है कि सैंपल लेकर मात्र औपचारिकता पूरी की जा रही है। जन स्वास्थ्य विभाग इसे कभी भी गंभीरता से नहीं लेता। यही कारण है कि पानी हमेशा से दूषित ही आ रहा है।
जन स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
पानी के सैंपल फेल आने की लिखित सूचना जन स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई है। दूषित पेयजल सप्लाई को रोकना जन स्वास्थ्य विभाग की कार्य क्षेत्र में है।
एचएल गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन, फतेहाबाद
पानी को किया जा रहा है स्वच्छ
जहां से भी दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायत आती है, वहां तय मानकों के अनुसार पानी को क्लोरीन की गैस और ब्लीचिंग पाउडर से स्वच्छ किया जा रहा है। ज्यादा क्लोरीन की गैस डालने से लोगों को शिकायत आती है कि पानी में बदबू आती है और दूध फट जाता है। ऐसे में हिसाब से ही क्लोरीन की गैस डाली जाती है। पाइप लाइन लीकेज को भी ठीक कराया जाएगा।
विक्रम सिंह, कार्यकारी अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग