फतेहाबाद। मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग में तैनात फार्मेसी ऑफिसर को वर्ष 2018 में हटा दिया गया था। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और एचकेआरएन के तहत भर्ती करने के आदेश दिए गए।
वहीं सिविल सर्जन कार्यालय ने कोर्ट के आदेश बाद भी फार्मेसी ऑफिसर को भर्ती नहीं किया। सात साल से भर्ती को लेकर फार्मेसी ऑफिसर संदीप कार्यालयों के चक्कर काट रहा है।
ये हालात तब हैं जब अस्पताल में फार्मेसी ऑफिसर के 50 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं। पीड़ित संदीप ने बताया कि एमएमआईवाई के तहत वर्ष 2013 में भर्ती हुआ था। 14 सितंबर 2018 को उसे बिना नोटिस दिए हटा दिया गया।
संदीप के अनुसार अस्पताल में तीन फार्मेसी ऑफिसर तैनात थे। मामले को लेकर तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले और स्वास्थ्य विभाग महानिदेशक के सामने भी मामला रखा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद हाईकोर्ट में मार्च 2019 में याचिका लगाई। कोरोना काल के चलते मामले में 26 मई 2022 को निर्देश दिए गए कि जिस तारीख से हटाए गए फार्मेसी ऑफिसर को एचकेआरएन में समायोजित किया जाए।
उसके बाद भी भर्ती नहीं किया गया। सिविल सर्जन कार्यालय ने शिकायतकर्ता को कहा कि एचकेआरएन में उसका पंजीकरण नहीं है।
इस पर संदीप ने पंजीकरण करवाया। उसके बाद भी भर्ती नहीं किया गया। इस पर कोर्ट की अवहेलना की वर्ष 2023 में याचिका लगाई गई। तत्कालीन सिविल सर्जन ने कोर्ट में जवाब दिया कि पद आएगा तो भर देंगे।
संदीप ने एचकेआरएन में दो बार आवेदन किया। जिसमें 21 जनवरी 2024 और 13 नवंबर 2024 शामिल हैं। संदीप ने बताया कि अब तक चार सिविल सर्जन बदले जा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं कर रहा है।
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मामला फिलहाल संज्ञान में नहीं है। क्या मामला है इस संबंध में सोमवार को पता करके ही बता पाएंगे।
- डॉ. कुलप्रतिभा, सिविल सर्जन, फतेहाबाद।