रामनगर कॉलोनी में जीवन रक्षक टीके लगाने के बाद एक डेढ़ वर्षीय बच्चे की मौत हो गई जबकि चार अन्य की हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों ने बच्चों को निजी अस्पतालों में भर्ती करवाया है। कॉलोनी में दहशत का माहौल है जबकि मृतक बच्चे के परिजनों में रोष है।
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम अमना तरसीम अस्पताल पहुंचीं और मामले की जानकारी ली। पुलिस ने परिजनों के बयान लेकर जांच शुरू कर दी है। एसडीएम के आदेश पर बच्चे के शव को पोस्टमार्टम के लिए फतेहाबाद के सामान्य अस्पताल में भेजा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने लगाई गई वैक्सीन का सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिया है। उधर डॉक्टरों ने सांस नली में दूध फंसने से बच्चे की मौत की आशंका जताई है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवजात बच्चों को जीवन रक्षक टीके लगाए जाते हैं। इसी कड़ी में शनिवार को विभाग की एएनएम रजनी के नेतृत्व में एक टीम ने रामनगर कॉलोनी पहुंच कर बच्चों को पांच बीमारियों से बचाने के लिए पैंटावेलन के टीके लगाये थे।
उन्होंने रामनगर कॉलोनी के करीब आठ बच्चों को टीके लगाए थे। शनिवार शाम तक पांच बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। इसमें डेढ़ माह के बच्चे परमजीत पुत्र ओम प्रकाश की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। रात दो बजे बच्चे को एक निजी चिकित्सक के पास ले जाया गया, जहां चिकित्सक ने बच्चे को सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। रतिया के सामान्य अस्पताल में रविवार अलसुबह बच्चे परमजीत ने दम तोड़ दिया। वहीं टीका लगने वाले चार अन्य अन्य बच्चे दीपांशु, संजना, संध्या और प्रिंस की तबीयत भी बिगड़ गई।
संजना की तबीयत अधिक बिगड़ने पर परिजन उसे हिसार ले गए जबकि अन्य तीन बच्चों को रतिया के सामान्य अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डेढ़ माह के परमजीत की मौत और अन्य बच्चों की तबीयत बिगड़ने की इस घटना के बाद लोगों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रामनगर कॉलोनी का दौरा किया। मामले की सूचना मिलते ही एसडीएम अमना तरसीम ने अस्पताल पहुंचकर मामले की जानकारी ली। एसडीएम अमना तरसीम ने मृतक बच्चे के परिजनों को सांत्वना दी और आश्वासन दिया कि मामले की निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के कोल्ड स्टोर में पड़ी वैक्सीन की सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए। एसडीएम ने एसएमओ विजय जैन को मामले की जल्द जांच के आदेश दिए हैं।
बच्चे की मृत्यु प्रथम दृष्टया वैक्सीन से नहीं हुई है, न ही कोई बच्चा बीमार हुआ है। बच्चे की मां द्वारा जो दूध बच्चे को पिलाया गया वो सांस नली में फंसने से बच्चे की मौत होने का अंदेशा है। मामले की पूरी जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। टीकाकरण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालता। बीसीजी, पोलियो और पेंटा के टीके जीरो से डेढ़ माह के बच्चों को लगाने होते हैं।
मृतक बच्चे के अलावा ये टीके छह अन्य बच्चों को लगाए गए थे। सभी दूसरे बच्चों के परिजनों से घर-घर जाकर बात की है। सभी अन्य बच्चे स्वस्थ हैं। टीकाकरण के पश्चात होने वाले मामूली बुखार के अलावा किसी बच्चे को कोई शिकायत नहीं है। एहतियात के तौर पर इन टीको में प्रयोग की गई दवाइयों के सैंपल सील कर दिए गए हैं। उनको जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। इसके अलावा उस बैच नंबर के सभी अन्य टीकों को भी सील कर दिया गया है। - डॉ. विजय जैन, एसएमओ