रतिया। आत्मा को जन्म व मृत्यु के बंधन से मुक्त कराने के लिए भक्ति मार्ग से जुड़कर सत्कर्म करना होगा। हवन-यज्ञ से वातावरण एवं वायुमंडल शुद्ध होने के साथ-साथ व्यक्ति में आत्मिक बल एवं धार्मिक आस्था जागृत होती है। हवन-यज्ञ से देवता प्रसन्न होकर मनवांछित फल प्रदान करते हैं। श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से व्यक्ति भव सागर से पार हो जाता है और व्यक्ति के पाप पुण्य में बदल जाते हैं।
उक्त प्रवचन संत शिरोमणि नारायण मुनि के पावन सानिध्य में श्रीकृष्ण गोशाला के प्रांगण में गो सेवा हेतु पितृ पक्ष में श्रीकृष्ण गोशाला कमेटी द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ के समापन दिवस पर प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य प्रदीप शास्त्री ने कहे। सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा व ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन रविवार को गोशाला कमेटी, समस्त धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के सदस्य व काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने संयुक्त रूप से हवन-यज्ञ किया।
मंदिर पुजारी पवन कौशिक व धीरज भारद्वाज ने संयुक्त रूप से श्रद्धालुओं को जीवन में भगवान श्रीकृष्ण जी के आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।