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Fatehabad News: जिंदगी की शाम में ज्ञान का उजाला 92 साल के बुजुर्ग देंगे साक्षरता परीक्षा

Sat, 19 Sep 2026 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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परीक्षा की तैयारी करते हुए बुजुर्ग स्त्रोत ​शिक्षा विभाग
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फतेहाबाद। उम्र के जिस पड़ाव पर लोग आराम करना पसंद करते हैं वहीं जिले के 92 साल तक के बुजुर्ग अब किताब और कलम थामकर नई मिसाल कायम करने जा रहे हैं। उल्लास कार्यक्रम के तहत रविवार को जिले के 265 केंद्रों पर प्रारंभिक साक्षरता परीक्षा होगी। इसमें करीब 3750 निरक्षर परीक्षार्थी शामिल होंगे।
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परीक्षा सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक आयोजित होगी। बुजुर्गों का यह प्रयास बताता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। जीवन के लंबे सफर के बाद भी ज्ञान हासिल करने की ललक उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है।
इस पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को पढ़ना-लिखना सिखाने के साथ उन्हें रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भर और जागरूक बनाना है। साक्षर होने के बाद वे अपना नाम पढ़-लिख सकेंगे। जरूरी जानकारी समझ सकेंगे। दस्तावेजों की पहचान कर सकेंगे और सामान्य गणना भी स्वयं कर पाएंगे।
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साक्षरता का यह प्रयास उनके आत्मविश्वास को मजबूत करेगा। साथ ही सरकारी योजनाओं और अपने अधिकारों की जानकारी हासिल करने में भी मदद मिलेगी। इन बुजुर्गों की लगन समाज के लिए प्रेरणा है। वे यह संदेश दे रहे हैं कि सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा हो तो उम्र कभी रास्ते की दीवार नहीं बनती।
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ये देंगे परीक्षा
खंड परीक्षार्थी केंद्र
फतेहाबाद 1200 78
रतिया 800 81
भट्टू 300 36
टोहाना 600 36
जाखल 350 16
भूना 500 18
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22 हजार से अधिक लोग बन चुके साक्षर
जिले में उल्लास कार्यक्रम के तहत अब तक 22 हजार से अधिक निरक्षर को साक्षर बनाया जा चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी संगीता बिश्नोई का कहना है कि जो लोग किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए उन्हें जीवन के किसी भी पड़ाव पर पढ़ने-लिखने का अवसर मिले। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआईओएस) के माध्यम से यह प्रारंभिक परीक्षा कराई जा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार परीक्षा में शामिल होने वाले बुजुर्गों और अन्य परीक्षार्थियों को इसके लिए तैयार किया गया है।

उल्लास कार्यक्रम की यह परीक्षा समाज के लिए भी एक संदेश है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उम्रदराज लोगों का साक्षर होना उन्हें अपने दैनिक जीवन में अधिक जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने के साथ परिवार और समाज में भी सकारात्मक बदलाव ला सकता है। इसी के तहत ये परीक्षा ली जा रही है। जिले में 265 केंद्र बनाए गए हैं।
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- रमनदीप, सदस्य, जिला उल्लास कार्यक्रम, शिक्षा विभाग
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