फतेहाबाद के पीएमश्री स्कूल में मिड डे मील लेते हुए छात्राएंसंवाद
फतेहाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना का संकट जारी है। कई जगहों पर गुरुजी बिस्कुट से काम चला रहे हैं तो कहीं खुद की जेब से मिड-डे मील की व्यवस्था कर रहे हैं। शिकायतों के चलते निदेशालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि हर माह की 10 तारीख तक मिड-डे मील सामग्री की मांग हरियाणा एग्रो को भेजना सुनिश्चित किया जाए।
जिले के स्कूलों में पिछले तीन माह से राशन और बजट की किल्लत का मामला उजागर होने के बाद निदेशक मौलिक शिक्षा हरियाणा ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और हरियाणा एग्रो के प्रबंधकों को तलब किया और बैठक ली। उन्होंने चेतावनी दी की बार-बार निर्देश देने के बावजूद यदि भविष्य में इस प्रक्रिया में कोई कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा निदेशक ने हरियाणा एग्रो को आदेश दिए गए हैं कि जिले के स्कूलों में दो दिन के भीतर हर हाल में राशन की आपूर्ति सुनिश्चित कराएं।
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संघ ने डीईईओ पर लगाया था गुमराह करने का आरोप
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने आरोप लगाया था कि दिसंबर माह से अब तक स्कूलों को कुकिंग कॉस्ट भोजन पकाने की राशि प्राप्त नहीं हुई है। हालात इतने खराब हैं कि शिक्षकों को अपनी जेब से पैसा खर्च कर राशन खरीदना पड़ रहा है ताकि बच्चों को भूखा न रहना पड़े। संघ के पदाधिकारियों ने कहा था कि विभाग कभी हरहित स्टोर तो कभी हरियाणा एग्रो से राशन लेने के निर्देश देकर केवल गुमराह कर रहा है जबकि वास्तविकता यह है कि अभी तक किसी भी माध्यम से राशन नहीं पहुंचा है। संघ के राज्य चेयरमैन देवेंद्र दहिया ने विभाग को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि एक सप्ताह के भीतर राशन की आपूर्ति और बकाया बजट जारी नहीं किया गया तो स्कूलों में मिड-डे मील बनाना बंद कर दिया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। संघ ने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी अनिता बाई पर गुमराह करने का आरोप लगाया था। डीईईओ द्वारा मिड डे मील बजट की कोई डिमांड न आने और स्कूलों को अपने स्तर पर राशन खरीदने के दावों को झूठा करार दिया था।
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स्कूलों में शिक्षकों को अपनी जेब से मिड-डे मील की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इसके अलावा कई जगहों पर बच्चों को मिड-डे मील खिलाया भी नहीं जा रहा है तो कहीं बिस्कुट से काम चल रहा है। यदि दो दिन के भीतर स्कूलों में राशन नहीं पहुंचा और बकाया बजट जारी नहीं हुआ तो शिक्षकों के पास आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
- देवेंद्र सिंह दहिया, राज्य चेयरमैन, राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ