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चूल्हे पर निवाला पका रहे उज्जवला के लाभार्थी

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रसोई घर में खाली पड़ा सिलिंडर दिखाती लाभार्थी महिला। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। पर्यावरण प्रदूषण को रोकने व महिलाओं की सेहत को ध्यान में रखकर बनाई गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना एक बार फिर धुआं-धुआं हो गई है। बीपीएल परिवारों की महिलाओं को मुफ्त गैस सिलिंडर देने की यह योजना बाद में सभी राशन कार्ड धारक महिलाओं के लिए आरंभ तो की गई, लेकिन रसोई गैस के निरंतर बढ़ते दामों के कारण अब गरीब परिवारों के पास गैस सिलिंडर भरवाने का साहस ही नहीं हो पा रहा है। यह परिवार एक बार फिर चूल्हे पर आ गए हैं। भयंकर गर्मी में इन परिवारों की महिलाएं लकड़ियों से चूल्हे के आगे खाना पकाने को मजबूर हैं।
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बता दें कि ग्रामीण इलाकों में तो महिलाएं लकड़ियां ढूंढती फिर रहीं हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में भी बीपीएल परिवारों के लोग इधर-उधर से लकड़ियों का जुगाड़ कर रहे हैं। इन परिवारों के लोगों का कहना है कि जब यह योजना शुरू हुई तो उनके चेहरों पर रौनक थी कि अब वह भी गैस चूल्हे पर खाना पकाएंगे और घर की महिलाओं को धुएं से निजात मिलेगी, लेकिन अब तो हालात यह हो गए हैं, उनको पहले रोजी रोटी के लाले थे अब रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण सिलिंडर भरवाने के लिए उनके पास पर्याप्त राशि नहीं है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मई 2016 को देश के लिए महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना आरंभ की थी। इस योजना के तहत पहले बीपीएल परिवारों की महिलाओं को मुफ्त गैस सिलिंडर दिए गए। इसके बाद ग्रामीण व शहरी तबकों में रहने वाली हर कार्ड धारक महिलाओं को भी इस योजन से जोड़ा गया और उनको भी राशन कार्ड पर गैस सिलिंडर मिलने लगे। इस योजना के तहत महिलाओं मिलने वाले गैस सिलिंडर व चूल्हे के लिए 1600 रुपये केंद्र सरकार व 1600 रुपये संबंधित गैस कंपनियों को देने थे। योजना का असर भी हुआ और बीपीएल परिवारों के घरों में गैस सिलिंडर पहुंचे। संवाद
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पर्यावरण को बचाने व महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बनाई गई थी योजना
उज्ज्वला योजना को लेकर केंद्र सरकार का मत था कि गरीब परिवारों के पास गैस सिलिंडर लेने या इसे भरवाने के लिए कोई साधन नहीं हैं। इन परिवारों की महिलाएं सारा दिन चूल्हे पर भोजन पकाती हैं और उनका स्वास्थ्य खराब होता है। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण भी बढ़ता है। आरंभिक तौर पर तो इस योजना को सभी को फायदा हुआ और उनको गैस सिलिंडर पर सब्सिडी भी मिलती थी, लेकिन अब जैसे ही गैस सिलिंडरों के रेट आसमान की ओर बढ़े तो इन परिवारों के घरों में गैस सिलिंडर मात्र शोपीस बनकर रह गए हैं।
जिले में हैं 24,713 लाभार्थी
हालांकि, उज्ज्वला योजना को अभी तक बंद नहीं किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में इस समय उज्ज्वला योजना के तहत 24,713 लाभार्थी हैं। इसमें भारत पेट्रोलियम के 21,647 व हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 3066 लाभार्थी हैं।
सिलिंडरों के रेट पहुंचे 1020 पर, तो किया किनारा
फतेहाबाद जिले में गैस सिलिंडरों के रेट लगातार बढ़ रहे हैं। इस समय जिले में गैस सिलिंडर की कीमत 1020 रुपये तक पहुंच गई है। अगर होम डिलीवरी करवाई जाए तो सिलिंडर के 1040 रुपये देने पड़ेंगे। मध्यम या उच्च वर्गीय परिवारों के लोग तो इसे वहन कर लेते हैं, लेकिन निम्न मध्यम व गरीब परिवारों के लिए यह राशि अधिक है।
भयंकर गर्मी में चूल्हे पर बन रहा खाना
जिले में गैस सिलिंडरों के दाम बढ़ने के बाद उज्ज्वला योजना के तहत सिलिंडर लेने वाले लाभार्थियों में भारी गिरावट देखी जा रही है। इस समय हालात यह हैं कि इस योजना के 60 फीसदी लाभार्थियों ने तो सिलिंडर लेने ही बंद कर दिए हैं। अब ये लोग अपने घरों में चूल्हे पर भोजन पकाने को मजबूर हैं और योजना की लाभार्थी महिलाओं को भयंकर गर्मी में अपने घर के बाहर चूल्हे पर भोजन पकाना पड़ रहा है।
सरकार चाहे तो वापस ले ले गैस सिलिंडर
उज्ज्वला योजना के लाभार्थी शहर की रेगर बस्ती निवासी सुभाष चंद्र ने बताया कि जब उज्ज्वला योजना लागू हुई थी, उस समय उनको लगा था कि उनके भाग खुल गए हैं। सिलिंडर मुफ्त में मिला और बाद में रिफिलिंग पर भी सब्सिडी मिलती थी। शुरू में उनको 400 रुपये में सिलिंडर मिलता था और उस पर भी सब्सिडी मिलती थी, लेकिन अब तो सिलिंडरों के दाम 1020 रुपये पहुंच गए हैं। हम मजदूर परिवार से हैं। हमारी इतनी हैसियत नहीं कि सिलिंडर को इतने रुपये देकर रिफिल करवा सकें। अगर ऐसे ही गैस के दाम बढ़ाए जाएंगे तो वह सरकार को गैस सिलिंडर वापस देने को तैयार हैं।
300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी, कैसे लें गैस सिलिंडर
रेगर बस्ती के ही उज्ज्वला योजना के लाभार्थी सूरजाराम ने बताया कि पहले उनके घर में मुफ्त में गैस सिलिंडर आया। इसके बाद लगातार गैस सिलिंडरों के दाम बढ़ने लगे। 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी है, जिससे घर का गुजारा करना मुश्किल है। किराए का मकान है और अब सिलिंडर के दाम 1020 रुपये तक पहुंच गए हैं। ऐसे में वह गैस नहीं खरीद सकते और उनको मजबूरन चूल्हे पर रोटियां पकानी पड़ रही हैं।
कोट
हमारे पास उज्ज्वला योजना के तहत 1800 कनेक्शन हैं। जब से गैस सिलिंडरों के दाम बढ़े हैं, तब से उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों ने गैस सिलिंडर खरीदने को लेकर अपने हाथ खींच लिए हैं। इस योजना के तहत केवल 40 फीसदी लोग ही सिलिंडर ले रहे हैं। इस योजना के 60 फीसदी लाभार्थी गैस सिलिंडर नहीं खरीद रहे हैं।
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-कर्मबीर, मैनेजर, श्रीबालाजी गैस एजेंसी, फतेहाबाद।

रेगर बस्ती में चूल्हे पर खाना पकाती उज्जवला योजना की लाभार्थी महिला।- फोटो : Fatehabad

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