फतेहाबाद। गांव अयाल्की में लगने वाला पशु मेला पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है। पहले अत्यधिक गर्मी के कारण प्रशासन ने मेले को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया था फिर बाढ़ के कारण तीन महीने तक मेला नहीं लग पाया। इसके बाद प्रशासन ने मेला फिर से शुरू नहीं करवाया।
पशु व्यापारियों ने लघु सचिवालय के बाहर धरना भी दिया था लेकिन इसके बावजूद मेला शुरू नहीं हो पाया। मेले को शुरू करने के लिए प्रशासन ने प्रयास किए, लेकिन काम करने वाली एजेंसियों ने नियमों का हवाला देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जिसके बाद सरकार को नियमों में बदलाव करने की सलाह दी गई। इसके चलते सरकार की ओर से पशु मेला संबंधी कोई स्पष्ट पॉलिसी तैयार नहीं की गई।
गांव अयाल्की का पशु मेला केवल व्यापार का केंद्र ही नहीं था बल्कि यह पशुपालकों के लिए अपनी नस्लों को सुधारने और अच्छे दामों पर पशु बेचने का एक महत्वपूर्ण स्थान था। अब स्थिति यह है कि क्षेत्र के किसानों को अपने पशु बेचने के लिए अन्य जिलों या राज्यों की मंडियों का रुख करना पड़ रहा है जिससे उनकी लागत में वृद्धि हो रही है और जोखिम भी बढ़ गया है। इस मेला के बंद होने से न केवल हजारों पशुपालकों को दिक्कतें हो रही हैं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान हो रहा है।
सख्त नियमों ने थामी मेले की रफ्तार
गांव अयाल्की में पशु मेले के बंद होने के पीछे सबसे बड़ा कारण सरकार की ओर से समय-समय पर बनाए गए सख्त नियम और नीतियां हैं। पूर्व में पशुओं की खरीद-फरोख्त पर लगने वाली पाबंदियों, लंबी कागजी कार्रवाई और परिवहन से जुड़े कड़े नियमों के चलते एजेंसियों को काफी परेशानी होती है। जिस कारण वहां पर काम करने या सुविधा देने वाली एजेंसी इस मेले से दूरी बना ली।
खत्म हुआ रोजगार, खाली हुआ खजाना
इस मेले के बंद होने का सीधा असर सीधे तौर पर स्थानीय लोगों व सरकार को मिलने वाले राजस्व का काफी नुकसान हो रहा है। मेले के दौरान सैकड़ों ग्रामीण, छोटे दुकानदार, चारे के व्यापारी, ढाबा संचालक और परिवहन सेवाओं से जुड़े लोगों को सीधा रोजगार मिलता था। मेले के बंद होने से इन लोगों ने या तो काम ही बदल लिया और कुछ मजदूरी करने लग गए। इसके साथ ही जिला प्रशासन और हरियाणा सरकार को इस मेले के जरिये हर माह लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता था। मेले की पर्ची, दुकान आवंटन और अन्य शुल्कों से होने वाली यह आय अब पूरी तरह शून्य हो गई है।
सरकार को पूरे हरियाणा में लगने वाले पशु मेले की ओर ध्यान देना चाहिए। सरकार को जल्द से जल्द नई पाॅलिसी बनाकर पशु मेले शुरू करवाने चाहिए। जिससे किसानों, व्यापारियों को काफी फायदा मिलेगा। वहीं मेला शुरू होने से काफी लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
- मनदीप नथवान, किसान नेता।
-
प्रदेश सरकार व जिला प्रशासन को पशु मेला शुरू करवाना चाहिए। पशु मेला न लगने से व्यापारियों के साथ-साथ सरकार को भी राजस्व का काफी नुकसान हो रहा है।
- मोहरी राम ग्रोवर, पशु पालक।
-
गांव अयाल्की में लगने वाले पशु मेले के लिए प्रदेश सरकार की ओर से कोई निर्देश नहीं हैं। जो भी निर्देश आएंगे उन्हीं के अनुसार कार्य किया जाएगा।
- अनूप कुमार, डीडीपीओ फतेहाबाद।