हर साल त्यौहारी सीजन में लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जाता
है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। दीवाली से कई दिन पहले ही खाद्य सामग्री
दूध, पनीर, मावा की भारी डिमांड रहती है।
सप्लाई पूरी न मिलने के
कारण मिलावटखोर नकली खाद्य सामग्री की सप्लाई शुरू कर देते हैं। इसके अलावा
इन दिनों बनाई गई खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े होते
रहते हैं।
अब मुद्दा यह है कि फेस्टिवल सीजन शुरू होने के बाद भी
अभी तक जिले में फूड सेफ्टी अफसर की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिले में
तैनात फूड सेफ्टी अधिकारी डीएस शर्मा का लगभग चार माह पहले जिले से तबादला
कर दिया गया था, तब से यह पद खाली पड़ा है।
अब अधिकारी ही नहीं है
तो इन मिलावटखोरों पर प्रशासन कैसे शिकंजा कसेगा, यह सोचने वाली बात है।
नवरात्रे व दशहरा बीत चुका है और जिले में कहीं भी खाद्य पदार्थों के सैंपल
नहीं लिए गए।
हालांकि विभाग के पास दावा करने के अलावा कोई चारा नहीं है कि टीम भेजकर सैंपल लिए जाएंगे।
हिसार
में तैनात फूड इंस्पेक्टर प्रेम सिंह को फतेहाबाद का चार्ज दिया गया था,
लेकिन अभी तक उन्होंने चार्ज संभालने में कोई रुचि नहीं दिखाई है।
प्रेम
सिंह के पास पहले ही हिसार के अलावा करनाल जिले का अतिरिक्त चार्ज है।
विभाग के उच्च अधिकारियों की माने तो इस संबंध में हिसार सीएमओ को लिखित
में पत्र भी भेजा गया लेकिन फूड इंस्पेक्टर ने समस्याओं का हवाला देकर अभी
तक चार्ज नहीं संभाला।
मिलावट को लेकर सुर्खियों में रहा है जिला
त्यौहारी
सीजन को छोड़कर अन्य दिनों में भी यहां पर मिलावट का कारोबार जोरों पर
होता है। विशेषकर पाउडर से दूध बनाकर बेचने में भी फतेहाबाद सुर्खियों में
रहा है।
भट्टूकलां के एक गांव में फरवरी माह में भारी मात्रा में
कैमिकल से बना दूध पकड़ा गया था तथा जिले में छापेमारी के दौरान कई खाद्य
पदार्थों के सैंपल फेल भी आ चुके हैं।
जितना हो सके मिठाइयों का कम प्रयोग करें
मिलावटी
व बिना ढकी मिठाइयां खाने से पीलिया, फूड प्वायजनिंग, डायरिया, टायफाइड
जैसी बीमारियां हो सकती है। मिठाइयों का प्रयोग कम करें। ताजा मिठाइयों का
ही प्रयोग करें।
डा. अंशुल सहगल
एम.डी.एम.बी.बी.एस.
पंजाबी सभा अस्पताल