इस पर किसानों में रोष पैदा हो गया और बोली रुकवाकर बस स्टैंड के सामने
नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। लगभग आधे घंटे तक लगे जाम के कारण वाहनों की
लंबी कतारें लग गई।
सूचना मिलते ही एसएचओ दिनेश कुमार तथा सब इंस्पेक्टर जगदीश मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया और मार्केट कमेटी कार्यालय में ले गए।
हंगामे
के बाद जब मंडी में दोबारा बोली शुरू हुई तो मुच्छल धान की जिस ढेरी को
लेने से मना कर दिया था उन्हीं ढेरियों की बोली साढ़े 15 सौ से 16 सौ रुपये
तक लगी।
नेशनल हाईवे पर जाम लगाकर खड़े किसान देवीलाल,
सुरजाराम, परमजीत, सुभाष, साबूराम, दोलतराम, प्रभुदयाल, रामसिंह ने बताया
कि वह पिछले पांच दिन से मंडी में धान लेकर बैठे हैं और बोली होने का
इंतजार कर रहे हैं।
लेकिन अभी खरीद नहीं हुई है। मुच्छल धान को प्राइवेट एजेंसियां खरीदते समय मनमानी कर रही हैं। मुच्छल धान
की सोमवार को 1600 रुपये तक बोली लगी थी लेकिन मंगलवार को 1000 रुपये में भी नहीं खरीदा जा रहा है।
जिस
कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसानों द्वारा नेशनल हाईवे पर लगाए
जाम के बाद स्टैंड चौकी प्रभारी कश्मीर सिंह मौके पर पहुंचे और किसानों को
समझाने का प्रयास किया लेकिन किसान नहीं माने।
सूचना मिलते ही
एसएचओ दिनेश कुमार, ट्रैफिक एसएचओ रिछपाल, सब इंस्पेक्टर जगदीश ने आश्वासन
देकर किसानों को मार्केट कमेटी कार्यालय में ले गए।
इस दौरान सचिव
मेजर सिंह व किसानों के बीच काफी देर तक बहस चलती रही। एसएचओ ने किसानों को
मंडी में ले जाकर दोबारा बोली शुरू करवाई। जिसके बाद किसान शांत हुए।
परेशानी का फायदा उठा रहे व्यापारी
मंडी
में 1509 और परमल को सरकारी एजेंसियां खरीद रही हैं जिसका न्यूनतम समर्थन
मूल्य 1450 रुपये तय है। जबकि अन्य क्वालिटी को प्राइवेट एजेंसियां खरीद
रही हैं।
मंडी में पांच दिन से धान लेकर बैठे किसानों की परेशानी
का प्राइवेट एजेंसी व व्यापारी फायदा उठा रहे हैं। मंगलवार को मुच्छल धान
की डिमांड न होने का हवाला देकर उसे एक हजार रुपये तक प्राइवेट एजेंसियां
बोली लगा रही थी।
जब किसानोें ने हंगामा किया तो उसी धान को 16 सौ रुपये तक में खरीदा गया।