फतेहाबाद। जिले में पिछले 15 दिनाें में वायु गुणवत्ता सूचकांक का आंकड़ा ऊपर-नीचे होता रहा है। पिछले 15 दिनों में सबसे खतरनाक स्तर पर मंगलवार को ही 335 एक्यूआई रहा है। धुंध और धुएं के असर से बने स्मॉग के कारण प्रदूषण का स्तर पिछले एक महीने से बढ़ा हुआ है। 10 नवंबर के बाद से एक्यूआई का पांच दिनों तक डाटा ही जारी नहीं हुआ।
16 नवंबर को एक्यूआई 130 रहा, लेकिन उसके बाद एकदम से बढ़कर 371 तक पहुंच गया। स्मॉग के कारण आंखों में जलन और सांस के रोगियों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। ऐसे रोगों से संबंधित रोगियों की ओपीडी में 20 से 30 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। नागरिक अस्पताल ही नहीं बल्कि निजी अस्पतालों में भी रोजाना मरीज आंखों की जांच करवाने पहुंच रहे हैं। दमा रोगियों को तो चिकित्सकों ने घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी हुई है।
एक बार भी नहीं करवाया पानी का छिड़काव
स्मॉग का असर ज्यादा बढ़ने के दौरान पानी का छिड़काव करवाया जाना चाहिए, इससे धुएं का असर कुछ कम होता है। मगर पिछले एक महीने के दौरान जिले में एक बार भी कहीं पानी का छिड़काव नहीं करवाया गया है। हालांकि, पराली जलाने वालों पर पहले से अधिक सख्ती की गई है। अब तक जिले में फसल अवशेष जलाने के 117 मामले आ चुके हैं। अब तक 54 किसानों पर एफआईआर दर्ज करवाई जा चुकी है। वहीं, 64 किसानों की लाल एंट्री दर्ज हो चुकी है। पांच किसानों के खिलाफ शिकायत दी जा चुकी है। मंगलवार को भी जिले में तीन जगह पराली जलाने के मामले आए हैं। इन लोकेशन पर जाकर टीमें बुधवार को जांच करेंगी।
पिछले 15 दिनों में यह रहा एक्यूआई
तारीख - एक्यूआई
4 नवंबर - 297
5 नवंबर - 269
6 नवंबर - 241
7 नवंबर - 296
8 नवंबर - 208
9 नवंबर - 198
10 नवंबर - 237
11 नवंबर - -
12 नवंबर - -
13 नवंबर - -
14 नवंबर - -
15 नवंबर - -
16 नवंबर - 130
17 नवंबर - 371
18 नवंबर - 319
19 नवंबर - 335
:: स्मॉग के कारण आंखों में जलन के रोजाना मामले आ रहे हैं। दुपहिया वाहनों पर चलते समय हेलमेट व चश्मा लगाकर रखें। दिन में कई बार आंखों को ठंडे पानी से धोते रहें। ज्यादा दिक्कत होने पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं।
-डॉ.विनोद शर्मा, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ
:: इस स्मॉग के कारण सांस के रोगियों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है। उनके लिए सांस लेना मुश्किल हो गया है। सांस के रोगियों को बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दे रहे हैं। मुंह पर मास्क लगाकर रखें। ऑक्सीजन भी चेक करवाते रहें।
-डॉ.मनीष टुटेजा, छाती रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल फतेहाबाद