पत्रकार वार्ता करते पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के सदस्य। स्रोत: संगठन
फतेहाबाद। किसान नेता मंदीप नथवान ने समय पर खाद, बीज और बीमा कंपनी की ओर से की जा ही मनमानी को लेकर कृषि विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव में किसान मजबूरी में पराली जलाते हैं। इसके लिए किसान नहीं बल्कि प्रशासन जिम्मेदार है।
पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर पराली जलाने वाले किसानों पर एफआईआर दर्ज की गई तो लड़ाई होगी।किसानों ने कहा कि सरकार किसानों को सुविधाएं देने के नाम पर बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है, लेकिन धरातल पर उनकी स्थिति की जायजा नहीं ले रही हैं। ऐसे में पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के सदस्य 29 अक्तूबर को उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगी।
मनदीप ने कहा कि बीमा कंपनियों की मनमानी के चलते किसानों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। फतेहाबाद, रतिया और भट्टू में किसानों की फसल बारिश से पूरी तरह बर्बाद हो गई है लेकिन बीमा कंपनियां कृषि विभाग के अधिकारियों के मिलकर ऑब्जेक्शन लगाकर क्लेम देने में आनाकानी कर रही है। इसे किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन गांवों के किसानों को एकजुट कर आंदोलन चलाया जाएगा।
महासचिव संदीप सिवाच ने कहा कि भट्टू इलाके में कपास, बाजरे, मूंग की फसल में नुकसान हुआ है। 23 गांवों में से 21 में बीमा कंपनी ने ऑब्जेक्शन लगा दिया है। या तो इन गांवों का क्लेम बनेगा या नाममात्र दिया जाएगा। किसान नेताओं ने कहा कि पराली में आग लगाने से रोकने के लिए बड़ी टीमें गठित की जा रही है, मगर किसान को नुकसान हो रहा है, उसको देखने पटवारी तक नहीं जाता। किसानों पर पराली न जलाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। पोर्टल पर फसल न बिकने की धमकी दी जा रहा है।