फतेहाबाद। डेंगू से ठीक होने के बाद मरीजों में अब तक फंगस का खतरा सता रहा है। पोस्ट डेंगू मरीज फंगस से पीड़ित हो रहे हैं। तीन आशंकित मरीज मिले हैं, जिनमें फंगस के लक्षण मिले हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है। फंगस आशंकित मरीज अग्रोहा मेडिकल व राजस्थान के जयपुर में उपचार करवा रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इसकी पुष्टि करने से बच रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि फंगस के केस पहले भी मिलते थे लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद केस ज्यादा सामने आए थे। डेंगू के कारण फंगस का कोई मामला सामने नहीं आया है और न ही ऐसी कोई गाइडलाइन मुख्यालय से आई है। डेंगू से ठीक हो चुके मरीजों के जबड़े पर असर हो रहा है। इसमें हड्डी गलनी शुरू हो जाती है। ऐसा ही फतेहाबाद निवासी युवक के साथ हुआ है। युवक को दिक्कत होने पर सिरसा उपचार करवाने के लिए पहुंचा, यहां डॉक्टरों ने जांच की तो उसमें पता चला कि जबड़ों में हड्डी गल रही है, मरीज की डेंगू की हिस्ट्री मिली। मरीज को उपचार के लिए अग्रोहा भेजा गया है। यहां उपचार चल रहा है। इसके अलावा भूना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति में भी फंगस के लक्षण मिले है। मरीज राजस्थान के जयपुर में उपचार करवा रहा है।
जिले में डेंगू मरीजों की स्थिति
जिले में डेंगू के लिए गए सैंपल : 4278
डेंगू मरीज मिले : 993
घरों में मिला लारवा : 5507
डेंगू के कारण कमजोर हो जाती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जब भी शरीर डेंगू वायरस से संक्रमित होता है, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया वायरस से लडऩे के लिए मिलकर काम करती है। प्रतिरक्षा प्रणाली की बी-कोशिकाएं एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं जो उस फॉरेन पार्टिकल्स की पहचान करके उन्हें बेअसर करती हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया में वायरस आपकी प्रतिरक्षा को कमजोर कर सकता है, जिससे आपके बीमार होने या अन्य फंगल संक्रमणों के शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है।
कोट
पोस्ट डेंगू मरीजों में फंगस का जिले में कोई केस नहीं है और न ही कोई जानकारी मिली है। इसके अलावा मुख्यालय से कोई गाइडलाइन और सूचना भी नहीं आई है।
- डॉ. वीरेश भूषण, सिविल सर्जन