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खाने की हर तीसरी चीज में मिलावट, 9 माह में मात्र 111 सैंपल लिए, 30 फीसद मिले फेल

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खाने की हर तीसरी चीज में मिलावट, 9 माह में मात्र 111 सैंपल, 30 फीसदी फेल
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जांच में 5 सैंपल मिले अनसेफ, 20 में मानक के मुताबिक गुणवत्ता ही नहीं
जिले में हर माह औसत लिए जा रहे मात्र 12 सैंपल
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के डीओ के पास पांच जिलों और एफएसओ के पास दो जिलों का कार्यभार
मुकेश खुराना
फतेहाबाद। हर तीसरे खाद्य पदार्थ में मिलावट मिल रही है, किसी खाद्य पदार्थ में मानक के मुताबिक गुणवत्ता नहीं है तो कोई स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। जिले में पिछले दिनों लिए गए खाद्य पदार्थों की सैंपल रिपोर्ट ये बयां कर रही है। 30 फीसदी सैंपल फेल आ रहे हैं। जिसमें अनसेफ, मिस ब्रांड और सब स्टैंडर्ड शामिल है, लेकिन गंभीर बात यह है कि हर तीसरा सैंपल फेल आ रहा है। इसके बावजूद जिले में खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग ही नाममात्र हो रही है।
जिले में औसत 12 सैंपल ही हर माह लिए जा रहे है। ऐसे में कैसे खाद्य पदार्थों में मिलावट रुकेगी, ये भी अपने आप में सबसे बड़ा सवाल है। जहां जिले में औसत 100 सैंपल हर माह होने चाहिए वहां मात्र 12 ही सैंपल लिए जा रहे हैं। पिछले माह विभाग के पास 7 सैंपलों की रिपोर्ट आई है। इसमें तीन सैंपल फेल मिले हैं। पनीर का सैंपल सब स्टैंडर्ड आया है तो दही और मसाला भी सब स्टैंडर्ड मिला है। (संवाद)
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माह सैंपल लिए रिपोर्ट आइ फेल
अप्रैल 0 0 0
मई 0 0 0
जून 26 0 0
जुलाई 12 26 12(1 अनसेफ, 7 सब स्टैंडर्ड और 4 मिस ब्रांड)
अगस्त 14 8 2 (2 मिस ब्रांड)
सितंबर 15 6 3 (3 सब स्टैंडर्ड और 1 मिस ब्रांड)
अक्तूबर 31 21 6 (2 अनसेफ, 1 मिस ब्रांड और 3 सब स्टैंडर्ड)
नवंबर 5 21 9 (7 सब स्टैंडर्ड और 2 मिस ब्रांड)
दिसंबर 8 4 1 (1 मिस ब्रांड)
27 केसों में हो चुका है 4 लाख जुर्माना
खाद्य एवं ओषधि प्रशासन विभाग सैंपल फेल आने पर मामलों को एडीसी कोर्ट में भेजता है। पिछले साल एडीसी कोर्ट ने अगस्त माह में 10 केसों में 2 लाख रुपये, सितंबर माह में 66 हजार रुपये, दिसंबर माह में 11 मामलों में 1 लाख 41 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
मसालें, दूध, दही,पनीर तक के सैंपल फेल
लोग सेहत बनाने के लिए जिन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल करते हैं उनमें भी मिलावट है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के पास जो रिपोर्ट आई है उसमें दूध, दही, पनीर, मसालों और सेंधा नमक तक का सैंपल फेल मिला है। यहां तक कि जिले में नकली दूध तैयार कर सप्लाई किया जा रहा है। सीएम फ्लाइंग के साथ मिलकर विभाग ने कार्रवाई की थी।
अफसरों के पास कई जिलों का चार्ज, कैसे हो सैंपलिंग
खाद्य एवं ओषधि प्रशासन विभाग के पास सैंपलिंग के लिए अफसर ही नहीं है। जिले में डीओ और एफएसओ होते हैं, जिनके ऊपर खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां हालात ये हैं कि डीओ के पास पांच जिलों का कार्यभार है। इसके अलावा एफएसओ के पास फतेहाबाद के साथ-साथ सिरसा की भी जिम्मेदारी है।
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वर्जन
कोरोना महामारी के चलते खाद्य पदार्थो की सैंपलिंग कम हुई है। जिले में अब अभियान चलाकर सैंपलिंग बढ़ाई जाएगी। दुकानदारों से भी अपील है कि वह नियम अनुसार रजिस्ट्रेशन करवाएं और लाइसेंस जरूर लें।
- सुरेंद्र पूनिया, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग
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