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Fatehabad News: प्रशासन के प्रयास नाकाफी, प्रदेश में सबसे अधिक फतेहाबाद में जल रही पराली

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फतेहाबाद। पराली जलाने के मामलों में फतेहाबाद जिला प्रदेश में पहले नंबर पर पहुंच गया है। रविवार को भी सबसे ज्यादा 25 मामले फतेहाबाद में ही सामने आए हैं। अब तक फतेहाबाद में पराली जलाने के 80 मामले आ चुके हैं। वहीं, दूसरे नंबर पर अंबाला है, जहां अब तक 79 मामले आए हैं। 67 मामलों के साथ कुरुक्षेत्र तीसरे स्थान पर है।पिछले एक सप्ताह में यह दूसरा मौका है, जब फतेहाबाद में सबसे अधिक पराली जलाने के मामले आए हैं। इससे पहले 8 अक्तूबर को भी सर्वाधिक 14 मामले फतेहाबाद में आए थे। कृषि विभाग लगातार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए जागरूक कर रहा है, लेकिन किसान बाज नहीं आ रहे हैं। जिले में पराली जलाने का सिलसिला थमा नहीं है, कभी एक या दो तो कभी छह तक मामले आए हैं। मगर रविवार को तो पराली जलाने के आंकड़ों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। हरसैक ने 25 जगहों पर पराली जलाने की लोकेशन भेजी है। लोकेशन मिलने के बाद राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारी छानबीन के लिए निकले। जिले में कृषि विभाग अब तक 27 किसानों को 67 हजार 500 रुपये का जुर्माना लगा चुका है।
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मामले बढ़े, एक्यूआई का स्तर घटा
फतेहाबाद में पराली जलाने के मामले बढ़े हैं। मगर एक्यूआई का स्तर कम हुआ है। एक्यूआई का स्तर शनिवार को जहां 190 दर्ज किया गया था, वहीं रविवार को यह घटकर 129 पहुंच गया। इसी के साथ दमा व दिल के रोगियों के लिए परेशानी बढ़ गई है। सुबह-सुबह दवा रोगियों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हो रही है। इसके अलावा आंखों में भी जलन महसूस हो रही है। पंजाब में जल रही पराली का भी जिले में असर दिखता है।

जिले में 337750 एकड़ में है धान का रकबा
जिले में करीब 337750 एकड़ में धान का रकबा है। जिले के सभी किसान स्ट्रा बेलर की मांग कर रहे हैं ताकि पराली का प्रबंधन किया जा सके। मगर बेलरों की संख्या 305 ही है। कुछ किसानों ने बेलर दूसरे जिलों में भी भेजे हुए हैं। उपायुक्त अजय सिंह तोमर ने जिले के सभी बेलर मालिकों को निर्देश दिए हैं कि अगर उनका बेलर निकटवर्ती जिले में कहीं चल रहा है तो जल्द से जल्द अपना बेलर फतेहाबाद में मंगवा कर पराली प्रबंधन का कार्य करें। उपायुक्त ने किसानों से इन-सीटू के माध्यम से पराली प्रबंधन करने की अपील करते हुए कहा कि खेत में पराली मिलाकर प्रबंधन करने से खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। इसके साथ-साथ मिट्टी में मौजूद मित्र कीट भी खत्म नहीं होते।
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कोट
आसमान में धुआं आने से आंखों में जलन की शिकायत अधिक रहती है। धुएं के कारण नजर कमजोर होना भी स्वभाविक है। ऐसे में घर से बाहर आंखों पर चश्मा लगाकर निकलें। दिन में कई बार आंखों को ठंडे पानी से धोएं। आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है।

डॉ. विनोद शर्मा, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ
कोट

कृषि विभाग लगातार किसानों को पराली प्रबंधन करने के लिए जागरूक कर रहा है। जो किसान पराली जला रहे हैं, उन पर जुर्माना किया जा रहा है। अब तक 67 हजार 500 रुपये जुर्माना वसूला जा चुका है।
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-डॉ. राजेश सिहाग, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, फतेहाबाद
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