खैरातीखेड़ा रोड पर प्रस्तावित अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का काम जनस्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय ने तकनीकी त्रुटियों के चलते रोक दिया है। करीब सात करोड़ की लागत से बनने वाले इस सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को खैरातीखेड़ा रोड पर पहले से बने एसटीपी के साथ बनाया जाना था। इसके बनने से शहर में बरसाती और सीवरेज पानी की निकासी की समस्या 20 साल के लिए खत्म हो जाएगी। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभियांत्रिकी विभाग ने इन त्रुटियों को दूर करके एसटीपी की फाइल दोबारा भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दरअसल, शहर में इससे पहले खैराती रोड पर पुराना सीवरेज डिस्पोजल काम कर रहा था। यहां का पानी थाना रोड से चिल्ली में प्रवेश करता था। हालांकि कम क्षमता का होने की वजह से बारिश के दिनों में निचले क्षेत्रों में पानी जमा रहता था। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए खैराती खेड़ा रोड पर 10 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण किया गया था। शहर में बरसाती और सीवरेज पानी के अत्यधिक लोड को देखते हुए विभाग ने पिछले वर्ष एसटीपी से रंगोई नाले तक 12 करोड़ की लागत से 13 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाकर एसटीपी से वेस्ट पानी रंगोई में छोड़ दिया है। इस लाइन के बिछने के बाद शहर के अधिकांश इलाकों में पानी के जमाव की समस्या से निजात मिल गई है। इस 10 एमएलडी के एसटीपी से प्रतिदिन दस करोड़ लीटर पानी रंगोई में जाता है।
विभाग ने शहर में बढ़ती आबादी को देखते हुए पिछले दिनों 5 एमएलडी क्षमता का अतिरिक्त सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस पर 6.86 करोड़ रुपये का खर्च आना था। इसे 2 वर्ष में बनाने का लक्ष्य रखा गया था। विभाग की मानें तो इस पांच एमएलडी के अतिरिक्त एसटीपी के बन जाने से फतेहाबाद से प्रतिदिन 15 करोड़ लीटर वेस्ट पानी शहर से बाहर हो जाता। इससे शहर में निकासी और सीवरेज के ओवरफ्लो होने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जानी थी। हालांकि शुक्रवार को जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग हरियाणा के इंजीनियर इन चीफ ने अतिरिक्त एसटीपी की इस फाइल में तकनीकी कमियों का हवाल देते इसे वापस भेज दिया। विभाग का कहना है कि फाइल में तकनीकी खामियों को दूर करके इसे हाथोंहाथ मुख्यालय वापस भेजा जा रहा है।
21 गांवों में चल रहा पेयजल पाइप लाइन डालने का काम
महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत जिले के 21 गांवों में पेयजल पाइप डालने का काम शुरू कर दिया गया है। गांव भोडा, धारनियां, नहला, दहमाण, जांडवाला सोतर, अयालकी, भट्टूकलां इत्यादि गांवों में यह काम तेजी से चल रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता फूल सिंह तंवर ने बताया कि शीघ्र ही सभी गांवों में पाइपलाइन डालने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद इन गांवों को भी नहरी पानी की आपूर्ति हो सकेगी।
‘प्रस्तावित अतिरिक्त एसटीपी के लिए बनाई गई योजना में तकनीकी कमियों का हवाल देते हुए उसकी फाइल वापस भेज दी गई है। इन कमियों को दूर करके अब इसे टेंडर प्रक्रिया से पहले मंजूरी हेतु दोबारा मुख्यालय भेजा जाएगा है। वहां से मंजूरी आने के बाद ही अब इस पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।’
-फूल सिंह तंवर, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग, फतेहाबाद।