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फतेहाबाद की छात्राओं के साथ 50 भारतीय विद्यार्थियों का दल खुद बस का इंतजाम कर रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला

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रोमानिया बॉर्डर के लिए बस से निकलती छात्रा सुप्रिया। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद की छात्राओं के साथ 50 भारतीय विद्यार्थियों का दल खुद बस का इंतजाम कर रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला
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चारों तरफ बरसे बारूद और तबाही की तस्वीर बने ओडेसा शहर में तीन दिन से फंसी थी छात्रा सुप्रिया और निशा
फोटो- 22
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहाबाद। सिर पर मंडराती मौत और ना उम्मीद होती जिंदगी को बचाने की कोशिशों के साथ आखिरकार तीन दिन बाद यूक्रेन के शहर ओडेशा में फंसी फतेहाबाद की छात्रा सुप्रिया और निशा रोमानिया बॉर्डर के लिए निकल पड़ी हैं। सुप्रिया और निशा जैसे 50 भारतीय विद्यार्थियों का दल यूक्रेन में खुद ही अपने स्तर पर बस का इंतजाम करके रोमानिया बॉर्डर के लिए निकला है।
रविवार दोपहर बाद तक भारतीय छात्रों का यह दल यूक्रेन में तबाही की गवाही देते हुए रास्तों, कस्बों और शहरों से गुजरता हुआ रोमानिया बॉर्डर की तरफ बढ़ रहा था। छात्रा सुप्रिया और निशा ने बताया कि वह अपनी रूममेट निशा के साथ यूक्रेन के ओडेशा शहर व आसपास के दूसरे इलाकों से जुटे 50 भारतीय विद्यार्थियों के दल के साथ निकलने में कामयाब हो गई हैं। इस दल में हरियाणा के साथ-साथ भारत के दूसरे राज्यों के विद्यार्थी शामिल हैं। सुप्रिया के अनुसार लगातार तीसरे दिन युद्ध के हालात यूक्रेन में बने हैं और यहां रुक-रुक कर अलग-अलग जगहों पर बमबारी और धमाके हो रहे हैं। खासकर राजधानी कीव की तरफ फाइटर प्लेन, एयरक्रॉफ्ट, हेलिकॉप्टर सहित थल सेना के टैंक व सैनिकों की गाड़ियों के बेड़े जाने जानकारियां मिल रही हैं। जिस बस के जरिये वे रोमानिया बॉर्डर की तरफ निकले हैं वह बस हर संभव कोशिश करके उन रास्तों से गुजर रही है जहां हमले होने की आशंका कम से कम है। बस में सफर करते हुए जहां आसमान से मौत रूपी बम, गोले गिरने का डर सभी को सता रहा है वहीं सामने से अचानक बस पर किसी भी सैन्य कार्रवाई का डर सभी के जहन में बना हुआ है।
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बॉर्डर पर पहुंचने के बाद भी कई तरह की परेशानियां
छात्रा सुप्रिया के अनुसार उनसे पहले रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे कई भारतीयों से बातचीत में पता चला है कि रोमानिया के बॉर्डर पर भी कई तरह की परेशानियां हो रही हैं। बॉर्डर पर क्रॉसिंग के लिए कई तरह की दस्तावेज की प्रक्रिया है जिसे पूरा करने में काफी समय लग रहा है और बॉर्डर पर लगातार यूक्रेन छोड़ने वालों की भीड़ बढ़ रही है। इसलिए भारतीय दूूतावास से अपील है कि वह प्रक्रिया को आसान बनाकर यहां भीड़ से भारतीय को निकालें।
तीन दिन तक मदद का इंतजार, फिर खुद करना पड़ा बंदोबस्त
रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले की रणनीति ऐसी रही कि किसी को कुछ समझने और संभलने का मौका नहीं मिला। इसी के कारण छात्रा निशा और सुप्रिया यूक्रेन के ओडेसा शहर में अपने फ्लैट में फंस गई। यूक्रेन का ओडेसा शहर रूस के सबसे शुरूआती हमले वाले टारगेट में रहने वाला शहर रहा, इसलिए सुप्रिया और निशा उनके जैसे कई भारतीय तीन दिन तक बाहर निकलने का सोच नहीं सके। तीन तक ये सभी मदद का इंतजार करते रहे, आखिरकार जब मदद पहुंचती नहीं दिखी तो ये सब खुद ही अपना बंदोबस्त करके तीसरे दिन ओडेसा शहर से निकले।
हेल्पलाइन नंबर के जरिये भारतीय लगातार कर रहे संपर्क
भारत सरकार और संबंधित दूतावास के हेल्पलाइन नंबर पर गंभीर परिस्थितियों में फंसे भारतीय लगातार संपर्क कर रहे हैं और किसी तरह से अपनी जगह छोड़कर बार्डर के लिए निकलने के प्रयास कर रहे हैं। गंभीर परिस्थितियों वाले शहरों से निकलने के लिए लगातार यूक्रेन में भारतीय स्थानीय स्तर पर हर संभव कोशिशों में लगे हैं।
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फतेहाबाद के 40 लोग यूक्रेन में, धीरे-धीरे बॉर्डर पहुंचने के मिल रहे संदेश
फतेहाबाद जिला से अब तक कुल 40 लोगों के यूक्रेन में होने का पता चल पाया है। इनमें से अभी तक सुप्रिया, निशा जैसी छात्र-छात्राओं के रोमानिया बॉर्डर की तरफ सुरक्षित पहुंचने के संदेश मिल रहे हैं। स्थानीय तौर पर परिवार लगातार मीडिया व सोशल मीडिया के जरिये यूक्रेन में बिगड़ते हालातों के बीच अपनों के सुरक्षित होने की प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं समय-समय पर यूक्रेन में मौजूद अपनों से उनकी सलामती के बारे में जानकारी ले रहे हैं।

फतेहाबाद की छात्रा निशा अपनी दोस्तों के साथ।- फोटो : Fatehabad

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