इस हादसे में बच्चे के मामा की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।
जिंदगी के लिए डॉक्टरों के चक्कर लगा रहे बच्चे को भी इस हादसे में चोटें
लगी हैं।
इससे पहले अग्रोहा में परिजन अस्पताल में बच्चे को भर्ती
करने के लिए गिड़गिड़ाते रहे लेकिन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। वे सिरसा
सिविल अस्पताल से जारी रेफर स्लिप पर मुहर लगाने की बात पर अड़े रहे।
इस
दौरान डॉक्टरों ने स्थानीय निवासी नहीं होने के कारण बच्चे को एडमिट भी
नहीं किया। थक हारकर जब परिजन दोबारा अग्रोहा से सिरसा सिविल अस्पताल रेफर
स्लिप में मुहर लगवाने लौट रहे थे कि फतेहाबाद सदर थाना के पास ट्रक की
चपेट में आ गए।
परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात अग्रोहा मेडिकल के साथ
सिविल अस्पताल सिरसा के डॉक्टरों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना
की सूचना मिलने पर शहर पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में ले लिया।
शनिवार
को परिजनों के ब्यान दर्ज करने के बाद पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को
सौंप दिया। पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर काबू करने के साथ
ट्रक को भी कब्जे में ले लिया है।
दूसरी ओर बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है। दूसरी ओर डॉक्टर ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इंकार कर रहे हैं।
जानकारी
के अनुसार डिंग मंडी निवासी मानसिंह की पत्नी सुनीता ने 15 दिन पहले
सतमासी लड़के को जन्म दिया। बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने के कारण
उसका सिविल अस्पताल सिरसा में उपचार चल रहा था।
शुक्रवार देर शाम
को बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर अग्रोहा रेफर कर दिया गया। परिजन व रिश्तेदार
बच्चे को सरकारी एंबुलेंस से अग्रोहा लेकर पहुंचे।
जान की परवाह नहीं, पहले कागजी कार्रवाई पूरा कर आओ
ड्यूटी
पर तैनात डाक्टरों ने बच्चे को रेफर स्लिप पर मोहर न होने के कारण दाखिल
नहीं किया। जिसके बाद परिजन बच्चे को वापस सिरसा ले जाने लगे।
देर रात को फतेहाबाद में सदर थाने के पास पीछे से आ रहे ट्रक ने ट्रैक्टर-ट्राली को ओवरटेक करते समय एंबुलेंस को टक्कर मार दी।
टक्कर
इतनी जबरदस्त थी कि एंबुलेंस में सवार बच्चे के मामा सतपाल निवासी भूथन
खुर्द फतेहाबाद, डिंग मंडी निवासी पिता मानसिंह, कुम्हारिया निवासी फुफा
संदीप, मां सुनीता, बुआ ममता, एंबुलेंस चालक सुरेन्द्र निवासी सिरसा सभी
घायल हो गए।
एंबुलेंस चालक किसी तरह संभला और घायलों को उसी गाड़ी
में लेकर फतेहाबाद अस्पताल पहुंचा। जहां डाक्टरों ने सतपाल को मृत घोषित कर
दिया।
अन्य घायलों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। बच्चे को भी शनिवार दोपहर बाद रेफर कर दिया लेकिन परिजनों ने ले जाने से मना कर दिया।
फिलहाल बच्चे को फतेहाबाद के सिविल अस्पताल की नर्सरी में वेंटिलेटर पर रखा गया है।
बड़ी
बात यह है कि अग्रोहा मेडिकल में जहां सीरियस मरीजों को रेफर किया जाता है
वहां मरीज की जान की परवाह किए बगैर कागजी कार्रवाई पूरा करने दोबारा
फतेहाबाद क्यों भेजा गया।
फतेहाबाद के डाक्टरों की मानें तो मरीज की जान बचाना उनका पहला काम है कागजी कार्रवाई बाद में भी हो सकती है।
बच्चे की हालत नाजुक है साब, एडमिट कर लो... नहीं पसीजा दिल
नवजात बच्चे के फुफा संदीप ने बताया कि सिरसा से जब बच्चे को रेफर किया गया तो उस स्लिप पर मोहर नहीं लगी थी।
जब
वह अग्रोहा मेडिकल पहुंचे तो डॉक्टरों ने दाखिल करने से मना कर दिया कि
स्लिप में अस्पताल की मोहर नहीं है, हम दाखिल नहीं करेंगे। उन्होंने कई बार
मिन्नतें भी की लेकिन डॉक्टर नहीं माने।
उन्होंने कहा भी कि बच्चे की हालत नाजुक है, एडमिट कर लो तो डाक्टर ने जवाब दिया कि सबूत लेकर आओ कि कहां से आए हो।
कहने के बाद भी नहीं लगाई रेफर स्लिप पर मोहर, गलती किसकी
परिजनों
का आरोप है कि जब बच्चे को रेफर किया गया तो एंबुलेंस चालक ने रेफर स्लिप
पर मोहर लगाने के लिए कहा लेकिन डाक्टरों ने मोहर नहीं लगाई। आखिरकार तबीयत
बिगड़ता देख एंबुलेंस चालक बिना मोहर के ही अग्रोहा के लिए चल पड़ा।
सतपाल की गोद में था बच्चा, सीट के नीचे गिरा और बच गई जान, सतपाल की चली गई जान
एंबुलेंस
के पीछे की सीट पर सतपाल नवजात बच्चे को गोद में लेकर बैठा था। जैसे ही
टक्कर हुई बच्चा उछलकर सीट के नीचे गिर गया। जिस कारण उसकी जान बच गई।
लेकिन सतपाल को गंभीर चोटें आई और उसे नहीं बचाया जा सका।