रविदास धर्मशाला से रेस्कयू किए लंगूर के बच्चे के साथ विभाग के कर्मी। स्त्रोत- नवजोत ढिल्लों
टोहाना। लंगूर के बच्चे के पीछे कुत्ते लगे हुए थे। वह उनके डर से रतिया रोड स्थित रविदास धर्मशाला में छुपा बैठा रहा। वहां मौजूद लोगों ने इसकी सूचना वन्य जीव रक्षकों की टीम को दी। जीव रक्षकों की टीम ने लंगूर के बच्चे का रेस्क्यू किया है।
इसके बाद टीम ने वाइल्ड लाइफ विभाग को सूचना देकर लंगूर के बच्चे को हिसार के डियर पार्क में भिजवा दिया। फतेहाबाद पशु क्रूरता निवारण कमेटी के सदस्य नवजोत सिंह ढिल्लों ने बताया टोहाना इलाके में कोई लंगूर बंदर नहीं है। यह लंगूर का बच्चा कहां से आया और कौन इसे लेकर आया है इसके बारे में फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
उन्होंने बताया कि वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत लंगूर बंदरों को कानूनी सुरक्षा दी गई है। कानून के अनुसार बंदरों से नुमाइश करवा कर लोगों का मनोरंजन करना या उन्हें कैद में रखना गैर कानूनी है। वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 की धारा 51 के अनुसार आदमी के मनोरंजन के लिए किसी पशु-पक्षी या जानवर की जिंदगी से आप खिलवाड़ नहीं कर सकते। मनोरंजन के लिए ट्रेंड करना और उनका इस्तेमाल करना गैरकानूनी है। इसके साथ ही किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना, फंसाना, लालच देना दंडनीय अपराध है। इस अपराध के लिए दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।