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जिले में एक ही दिन में 58 किसानों ने जलाई पराली, खतरनाक स्तर पर एक्यूआई, सांस लेने में हो रही दिक्कत

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कुलां के एक खेत में जलती पराली। - फोटो : Fatehabad
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प्रदेश सरकार व कृषि विभाग द्वारा किसानों को अनुदान पर पराली प्रबंधन के यंत्र देने के बावजूद भी पराली जलाने के मामले कम होने की बजाय लगातार बढ़ रहे हैं। रविवार को अवकाश के दिन जिले में 58 किसानों द्वारा पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। यह मामले हरसैक द्वारा सेटेलाइट से प्राप्त लोकेशन के आधार पर कृषि विभाग को भेजे गए हैं। कृषि विभाग ने सोमवार को चार किसानों पर मुकदमा दर्ज करवाया है। हालांकि, अभी तक किसी भी किसान की गिरफ्तारी की सूचना नहीं है। उधर, सोमवार को फतेहाबाद का औसत एक्यूआई 320 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। दमा रोगियों को तो सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी है।
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सोमवार को हरसैक से 58 किसानों की सूचना प्राप्त होने पर कृषि विभाग ने नोडल अधिकारी, पटवारी व ग्राम सचिव पर आधारित टीम को लोकेशन सर्च करने के लिए भेजा। सोमवार को एक ही दिन में प्रदूषण का स्तर 260 से बढ़कर 320 तक पहुंच गया जो कि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। कृषि एवं कल्याण विभाग को सोमवार को हरसैक से आगजनी की 58 नई लोकेशन मिली है जिसके साथ ही आगजनी की लोकेशन बढ़कर 362 हो गई। जबकि 20 लोगों ने अपने स्तर पर गांव में आग लगने की सूचना दे रखी है। विभाग की जांच में 122 आगजनी के मामले झूठे पाए गए। जबकि 111 किसानों पर विभाग ने पॉल्यूशन एक्ट के तहत केस दर्ज करवा दिया है। जिला प्रशासन ने पराली जलाने की सूचना न देने के मामले में अब तक 44 सरपंचों, 15 कृषि अधिकारियों व 4 ग्राम सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
एक एकड़ पराली प्रबंधन के लिए 2500 से 3000 रुपये ले रहे
सीएचसी सेंटर संचालक एक एकड़ पराली प्रबंधन के लिए 2500 से 3000 रुपये तक लेते हैं। जो छोटा किसान खर्च नहीं कर सकता। जिन किसानों ने ठेके पर खेती ले रखी है, वह प्रबंधन का खर्च नहीं उठाना चाहते। जिस कारण वह पराली को आग लगाना चाहते हैं। कृषि विभाग को हरसैक से लोकेशन प्रतिदिन मिलती है। विभाग लोकेशन की जांच करके किसानों के खिलाफ संबंधित थानों में शिकायत दे रहा है। इसके अलावा विभाग कुछ नहीं कर रहा। अब तो कृषि विभाग के अधिकारियों मौके पर जाना ही बंद कर दिया है। विभाग कह रहा है कि हमारे यहां धुआं सीमावर्ती प्रदेशों से आ रहा है। कृषि विभाग ने जिले में 478 कस्टम हायरिंग सेंटर खोले ताकि किसान यहां पराली प्रबंधन के यंत्र लेकर पराली का प्रबंधन कर सके। विभाग ने 193 ग्राम पंचायतों को कस्टम हायरिंग सेंटर का सामान दिया। अब छोटे किसानों के पास ठेके की जमीन है और वह इन यंत्रों का भुगतान करने में सक्षम नहीं है।
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घरों से बिना कारण बाहर न निकलें सांस के मरीज: डॉ. गुलशन
फतेहाबाद के निजी चिकित्सक डॉ. गुलशन मदान का कहना है कि घर से निकलते समय चश्मा व मास्क जरूर लगाएं। सांस के मरीज बिना कारण घरों से बाहर न निकलें क्योंकि उन्हें धुआं युक्त वातावरण से परेशानी हो सकती है। बुजुर्ग व बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
जिला प्रशासन व विभाग पराली जलाने के मामलों पर नजर रखे हुए हैं। बीते वर्ष 471 किसानों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। इस वर्ष अब तक 111 किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा दिया गया है। सरपंचों व ग्राम सचिवों के खिलाफ भी नोटिस जारी किए गए हैं।
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डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।
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