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Fatehabad News: फतेहाबाद डिपो में खड़ीं 51 जर्जर बसें, इस साल नहीं मिली कोई नई

Thu, 19 Dec 2024 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
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फतेहाबाद डिपो की वर्कशॉप में खड़ी कंडम बसें। संवाद
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फतेहाबाद। रोडवेज डिपो फतेहाबाद के पास कुल 110 बसों में से बसें इस साल जर्जर हो चुकी हैं। डिपो के पास अब बसों की कुल संख्या 103 रह गई है। वहीं कुछ बसें जर्जर हाेने की कगार पर है। मगर रोडवेज मुख्यालय की ओर से इस साल कोई भी नई बस फतेहाबाद डिपो को नहीं दी गई है।
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पिछले कुछ साल में राेडवेज की ओर से कुल 51 बसों को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इससे बेड़े में बसों की संख्या लगातार कम हो रही है। बसों की संख्या कम होने से रूट प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, बीते दिनों ही डिपो की पांच बीएस 6 बसें नारनौल डिपो को दी गई है। उसके बदले में पुरानी बसें नारनौल से फतेहाबाद आई हैं।

बीएस 6 बसें नारनौल डिपो को देने से फतेहाबाद से चलने वाले दिल्ली रूट प्रभावित हुए हैं, क्योंकि सरकार की ओर से सिर्फ बीएस 6 बसों को दिल्ली सहित एनसीआर इलाके में भेजने के आदेश हैं। फतेहाबाद डिपो की वर्कशॉप में डिपो की कुल 22 बसें जर्जर होने के बाद से खड़ी हैं। फतेहाबाद डिपो के अधीन रतिया, भट्टू व भूना का बस स्टैंड भी आता, वहां भी बाकी बसें जर्जर खड़ी हैं।
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-नीलामी के लिए नहीं लिखा गया पत्र

- फतेहाबाद डिपो की जर्जर खड़ी 51 बसों को बेचने या नीलाम करने के लिए रोडवेज की ओर से कोई भी पत्र नहीं लिखा है। जिस कारण से काफी समय से वर्कशॉप में खड़ी ये ये बसें और भी जर्जर हो रही हैं। रोडवेज प्रबंधन इस ओर काेई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे इनकी कीमतों में और कमी हो रही है।

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जर्जर हो चुकी बसों की करवा चुके है दो साल की अधिक पासिंग

- डिपो कर्मचारियों ने बताया कि जो बसें जर्जर हो चुकी हैं, उनकी जो समयावधि है, उससे भी दो साल अधिक चलाया जा चुका है। लेकिन फिर भी बसों को जर्जर घोषित कर बेचा नहीं गया। सरकार या रोडवेज को इस ओर ध्यान देना चाहिए। वहीं काफी बसों पर केस चल रहा है। जिस कारण इन बसों बेचा नहीं जा सकता। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि कोर्ट को इन केसों पर जल्द से जल्द फैसला सुनाना चाहिए। ताकि परिवहन सेवा में कोई दिक्कत ना हो। वहीं मामलों को लेकर जब फोन पर महाप्रबंधक से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

-सरकार व प्रशासन को जर्जर बसाें की ओर ध्यान देना चाहिए। इन बसों को नीलाम करके नई बसों को खरीदकर बेड़े में शामिल करना चाहिए। बेड़े में नई बसें शामिल होने से लोगों को काफी फायदा मिलेगा।
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- राजू बिश्नोई, जिला प्रधान, रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा महासंघ।
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