फतेहाबाद। जिले में फसल अवशेष जलाने पर नजर रखने वाली हरसेक की ओर से भेजी जा रही सैटेलाइट लोकेशन जांच में झूठी साबित हो रही है। जिले में अब तक हरसेक की ओर से भेजी गई 78 लोकेशन में से करीब 42 गलत पाई गई हैं। इसमें से 6 लोकेशन ऐसी है को कृषि कार्य में प्रयोग नहीं हो रही है।
इससे प्रशासन और किसान दोनों परेशान हैं। कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी लाेकेशन मिलते ही जांच करने पर पहुंच रहे हैं, लेकिन आसपास के 30 एकड़ के दायरे में भी वह लोकेशन नहीं मिल रही है। गलत लोकेशन की वजह से पुलिस और कृषि विभाग के कर्मचारियों को बेवजह भटकना पड़ रहा है।
कर्मचारियों को 36 लोकेशन ऐसी मिली जहां 30 एकड़ के दायरे तक आग लगी नहीं पाई गई। इस तकनीकी खराबी का खामियाजा किसानों और कर्मचारियों को भुगतना पड़ा है। विभाग के कर्मचारी हरसेक में आई तकनीकी खराबी से परेशान हैं। हरसेक से मिल रही गलत लोकेशन की वजह से उन्हें बार-बार मौके पर जाकर जांच करनी पड़ती है।
गलत लोकेशन की पुष्टि के बावजूद आवश्यक कार्रवाई न करने के आरोप में 41 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 4 पुलिस कर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। हालांकि जिले में शनिवार को एक्यूआई 331 रहा। शाम को लोगों को आंखों में जलन की समस्या का सामना करना पड़ा। वहीं हरसेक की लोकेशन के आधार पर अब तक 36 किसानों पर एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।
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शनिवार को एक स्थान जले फसल अवशेष
जिले में पिछले करीब 10 दिनों से पराली जलाने के मामले तेजी आ रही थी, लेकिन दो दिनों से इनमें कमी दर्ज हो रही है। शुक्रवार और शनिवार को जिले में एक-एक लोकेशन मिली है। इससे अनुमान है कि अगले दिनों में पराली जलाने के जीरो लोकेशन हो जाएगी।
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अधिकारियों ने किया गांवों का निरीक्षण
पराली प्रबंधन अभियान दौरान उपमंडल नोडल अधिकारी डॉ. रामेश्वर, खंड नोडल अधिकारी डॉ. जय कुमार तथा कृषि विकास अधिकारी डॉ. अंकित ढिल्लों ने पुलिस एवं फायर ब्रिगेड टीम के साथ फतेहाबाद क्षेत्र के विभिन्न गांवों का संयुक्त दौरा किया। दौरे के दौरान टीम को एक पराली से भरी ट्रॉली में आग लगी होने की जानकारी मिली। प्रशासनिक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और फायर ब्रिगेड को बुलाया गया। फायर ब्रिगेड और जेसीबी के सहयोग से आग पर जल्द काबू पा लिया गया, जिससे किसी बड़े नुकसान की आशंका टल गई।
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:: कृषि विभाग के कर्मचारी हरसेक से मिलने वाली लोकेशन पर तुरंत पहुंचकर आग लगने का कारण ढूंढ रहा है। लेकिन विभाग को आधे से ज्यादा लोकेशन झूठी मिली है। इस बार पराली जलाने के मामलों में काफी कमी दर्ज हुई है। विभाग का प्रयास है कि फसल अवशेष जलाने के मामले बंद हो। किसानों से अपील है कि पराली प्रबंधन में सरकार का सहयोग करें।
-डॉ. राजपाल, तकनीकी सहायक कृषि एवं कल्याण विभाग, फतेहाबाद।