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जीएसटी टैक्स चोरी करने वाली

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विष्णु नाढ़ोड़ी
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फतेहाबाद। आबकारी एवं कराधान विभाग ने फर्जी कंपनी बनाकर बोगस बिल काटकर टैक्स चोरी करने के मामले में 8 फर्म संचालकों के 2 करोड़ के इनपुट टैक्स क्लेम (आईटीसी) को ब्लॉक कर दिया है। अब कंपनियां उक्त दो करोड़ की राशि नहीं ले पाएंगी। जिला कराधान आयुक्त वीके शास्त्री ने इसकी पुष्टि की है। अब यह कंपनियां टैक्स मामले में अपना क्लेम नहीं कर पाएंगी।
मालूम हो कि जिला कराधान विभाग ने जब टैक्स नहीं भरने वाली कंपनियों के कार्यालय पर छापा मारा था तो कंपनियों के दफ्तर के स्थान पर झोंपड़ियां मिली थी। इसके बाद जब कंपनियों की जांच की गई तो पता चला कि उक्त कंपनियों में से किसी ने कैटल फीड, तो किसी ने कॉटन के फर्जी बिल काटकर करोड़ों का टैक्स चोरी कर लिया था। जिला आबकारी एवं कराधान आयुक्त ने विभिन्न अधिकारियों की टीमें गठित कर इन फर्मों के गोदामों में छापामार कार्रवाई की तो इन्हें फर्जी पाया था। इतना ही नहीं इन फर्जी कंपनियों के संचालकों ने न केवल बोगस बिल काटे बल्कि विभाग से क्लेम भी मांग लिया। विभाग के अधिकारियों के हरकत में आने के बाद जब जांच की गई तो उक्त कंपनियां फर्जी निकली। इसी कारण उक्त कंपनियों को 2 करोड़ का क्लेम ब्लॉक किया गया है।
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पुलिस ने राज्य जीएसटी अधिकारी संजय सिंह की शिकायत के आधार पर गोपाराम कंपनी, मनीष कॉटन फैक्टरी, रतिया की हरिओम फैक्टरी व सांई ट्रेडिंग कंपनी के विरोध धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। पुलिस की जांच में पाया गया है कि यह कंपनियां कैटल फीड के नाम से पंजीकृत थी लेकिन इन्होंने अपने बोगस बिलों में सीमेंट, सरिया, लोहा और बजरी आदि के बिल काटकर फर्जी तरीके से लेनदेन कर दिए थे। इतना ही नहीं इन कंपनियों ने फर्जी रूप से कागजात कर टैक्स का भी क्लेम मांग लिया। उधर इसी मामले में टोहाना के भारत जागृति मंच रेलवे रोड ने सीएम को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि यहां के सीए व सैल टेक्स के वकील सेल्स टैक्स के नाम पर वसूली कर रहे हैं। जागृति मंच ने आबकारी एवं काराधान आयुक्त को भी इस संबंध में पत्र लिखकर अवगत करवाया है कि सेल्स टैक्स विभाग के नाम पर टोहाना के सीए व सेल्स टैक्स एडवाइजर ने सेल्स टैक्स विभाग में लाइसेंस रिन्यू करवाने, एसेसमेंट करवाने नए साल की जीएसटी दाखिल करने व अन्य विभागीय कार्य के लिए अलग-अलग रेट तय कर रखे हैें। जिसके अनुसार सीए व वकील लोगों से रिश्वत के रूप में 2 हजार से लेकर 20 हजार तक वसूली कर रहे हैं। उक्त पैसे की न ही तो रसीद दी जा रही है तथा न ही कंफर्म की जा रही है। पत्र में बताया गया है कि सेल्स टैक्स में काम करवाने के नाम पर इन एडवाइजरों ने इतना फर्जीवाड़ा कर रखा है कि इसकी सीबीआई जांच करवाई जाए तो यह सबसे बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
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वर्जन
मामले की शिकायत मेरे पास आई है और मैं स्वयं इस मामले की जांच कर रहा हूं। इस मामले में अगर कोई सीए व एडवाइजर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
वीके शास्त्री, आयुक्त जिला आबकारी एवं कराधान
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