अमर उजाला ब्यूरो
रतिया। पुरातत्व विभाग की टीम ने गांव कुनाल में खुदाई का कार्य शुरू किया है। तीसरी ईसवी से संबंधित अवशेषों की तलाश को लेकर निरीक्षण करने पहुंची टीम की डिप्टी डायरेक्टर डा. बुनानी भट्टाचार्य ने संकेत दिया कि खुदाई के तहत पहले चरण की तरह मणके व अन्य हड़प्पा से संबंधित सामग्री मिली है, मगर नई तरह के अभी तक कोई भी अवशेष नहीं मिले हैं।
डिप्टी डायरेक्टर की देखरेख में हो रही खुदाई के तहत उनके साथ कैंप इंचार्ज दलबारा सिंह, रविकांत, शुभम, प्रवीन कुमार और नरेंद्र कुमार आदि ने प्राचीन उत्खनन शिविर के अलावा संबंधित गांव के इर्द-गिर्द पुरानी सभ्यता की तलाश को लेकर विशेष अभियान चलाया। नई जगह पर अवशेषों की तलाश को लेकर टीम ने अनेक जगहों का जायजा लिया और इसकी रिपोर्ट हरियाणा पुरातत्व विभाग के निदेशक, इंडियन आर्कोलॉजी डिपार्टमेंट नई दिल्ली, नेशनल म्यूजियम डिपार्टमेंट ऑफ आरकोलॉजी, आर्कोलॉजी डिर्पाटमेंट ऑफ इंडिया व पुरातत्व विभाग चंडीगढ़ को भेज दी। इस दौरान डिप्टी डायरेक्टर ने पत्रकारों से रू-ब-रू होते हुए बताया कि उनके विभाग की टीम करीब 30 वर्षों से गांव कुनाल के बाहर खेतों में स्थित प्राचीन उत्खनन शिविर खुदाई का काम कर रही है। टीम ने जब जायजा लिया तो कई जगहों पर टीम को पुरानी ईंटें मिली, जिसे देसी भाषा में लाहौरी व भदोड़ी ईंट कहा जाता है।
टीम ने जब ईंटों को जांचा तो प्राथमिक दृष्टि में ये ईंटें 3 ईसवी के पाषाण काल की मिली जो कि आज से करीब 1700 साल पुरानी सभ्यता की है। उन्होंने बताया कि उस समय लोग मकान बनाने के लिए इन्हीं ईंटों का प्रयोग करते थे। उन्होंने बताया कि उनकी टीम संबंधित गांव के इर्द-गिर्द भी अवलोकन कर रही है और सभ्यता की तलाश को लेकर टीम अनेक स्थानों पर खुदाई करेगी तथा हड़प्पाकालीन से संबंधित अवशेषों की पहचान कर सके और से पुरात्व विभाग के बनाए गए म्यूजियम में भेज सके। प्रश्र के उत्तर में उन्होंने पुन: बताया कि 31 मार्च तक कुनाल उत्खनन की निरंतर खुदाई की जाएगी और जो भी अवशेष पाए जाएंगे, उसकी रिपोर्ट भी दी जाएगी।