बेशक लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया हो लेकिन सरकारी विभागों का आपसी तालमेल नहीं होने से पराली जलाने के मामलों पर रोक नहीं लगी है। किसानों द्वारा फसल के अवशेष जलाने के मामलों को कोई भी विभाग गंभीरता से नहीं ले रहा। हरसैक सेेटेलाइट के माध्यम से पराली जलाने की लोकेशन कृषि विभाग को सौंपता है, ताकि आग लगाने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके। मगर कृषि विभाग हरसैक की लोकेशन को सही नहीं मान रहा है। शुक्रवार तक कृषि विभाग के पास हरसैक से 550 आगजनी की लोकेशन पहुंची। कृषि अधिकारियों का दावा है कि इनमें से 212 जगह पराली में आग नहीं लगी हुई थी। शेष 338 लोकेशन में से भी विभाग ने 156 किसानों के खिलाफ ही मामले दर्ज करवाए हैं बाकी मामलों में क्या हुआ, किसी को नहीं पता।
धान की पराली जलाने के मामले में पहले ग्रामीणों द्वारा कृषि विभाग को सूचना दी जाती थी लेकिन धीरे-धीरे ग्रामीणों ने विभाग को सूचना देनी बंद कर दी। साल-दर-साल धान के सीजन में पराली जलती रही और पर्यावरण में जहरीला धुआं फैलता रहा। अक्तूबर से लेकर नवंबर अंत तक जहरीले धुएं से लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान उठाना पड़ता है। लगातार फैलते प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट तक ने पंजाब व हरियाणा सरकारों को चेताया लेकिन किसी को कोई फर्क नहीं पड़ा। प्रदेश सरकार ने धान की पराली मेें आगजनी की लोकेशन प्राप्त करने के लिए हरसैक को जिम्मा सौंपा। हरसैक सेटेलाइट के माध्यम से प्रत्येक गांव से यह पता लगाने लगा कि किस गांव में किस खसरा व किला नंबर पर पराली जलाई गई। जब भी धान का सीजन आता है हरसैक प्रतिदिन लोकेशन कृषि विभाग को भेजता है। जिस आधार पर कृषि विभाग किसानों पर कानूनी कार्रवाई करने लगा। इस बार पिछले एक माह में कृषि विभाग को हरसैक से 550 लोकेशन मिली। विभाग ने इसके लिए विलेज लेवल कमेटी व विभाग के एडीओ से फिजिकल वेरिफिकेशन करवाया तो पता चला कि इसमें से 212 लोकेशन झूठी है। जो किला व खसरा नंबर हरसैक ने दिया वहां वास्तव में आग लगी ही नहीं। ऐसे में कार्रवाई करना उचित नहीं है। विभाग ने बची हुई 338 लोकेशन में से 156 के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पहले ही झाड़ चुका पल्ला
बता दें कि इससे पूर्व किसानों पर कानूनी कार्रवाई के लिए प्रदेश सरकार ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की जिम्मेदारी लगाई थी मगर बोर्ड अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया था कि यह राजस्व और कृषि विभाग का काम है। वही, इस पर कार्रवाई करे।
156 एफआईआर, गिरफ्तारी एक भी नहीं
अभी तक कृषि विभाग ने 156 किसानों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया, लेकिन इनमें से अभी तक एक किसान की भी गिरफ्तारी नहीं हुई। ऐसे में विभाग की कार्रवाई मात्र औपचारिकता नजर आती है। हालांकि, पराली जलाने की सूचना ना देने पर जिला प्रशासन ने 36 सरपंचों, चार ग्राम सचिवों, कृषि विभाग के 6 एडीओ, 9 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर रखा है।
शुक्रवार को 55 जगह पर पराली में आग लगाई
वीरवार तक विभाग को 452 लोकेशन मिली थी। शुक्रवार को 55 जगह पर पराली को आग लगाई गई। जिससे संख्या बढ़कर 507 हो गई। जिनमें से 212 झूठी बताई गई। वीरवार को 144 एफआईआर दर्ज हुई थी। शुक्रवार को 12 किसानों पर ओर एफआईआर करवाई गई।
हरसैक से मिली लोकेशन की ग्रामीण लेवल कमेटी ने जांच की तो 212 जगह पर पराली में आग नहीं मिली। कई बार ऊपर से लिए गए चित्र सही नहीं होते और आग के बारे में वास्तविक स्थिति का पता नहीं लग पाता। -डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए, फतेहाबाद।