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कु रूक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी पहुंचे भूना में

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अमर उजाला ब्यूरो
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भूना(फतेहाबाद)।
जनवरी से प्रदेश के सभी 90 हलकों में हलका स्तरीय रैलियों के माध्यम से समाज को जागरूक किया जाएगा। समाज में कुछ लोग जाति के नाम पर चंदा एकत्रित करके अपना घर चला रहे हैं। ऐसे ठेकेदारों से लोगों को बचकर रहना चाहिए और सबक सिखाना चाहिए। यह बात कुरूक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी ने भूना में लोकतंत्र सुरक्षा मंच के प्रदेश महासचिव भीम सिंह झीझर के प्रतिष्ठान पर प्र्रेसवार्ता में कही। इस मौके पर सांसद सैनी का भूना में कई जगह भव्य स्वागत किया गया। सैनी ने कहा कि जीन्द रैली में लाखों समर्थकों ने पहुंचकर लोकतंत्र सुरक्षा मंच को मजबूती प्रदान की है। इसलिए भविष्य में भी मंच का खुलकर समर्थन में आए।
उन्होंने कहा कि वह प्रदेश में सौ प्रतिशत आरक्षण के हक में हैं। लेकिन वह किसी जाति का आरक्षण के लिए विरोध नहीं कर रहे हैं। परंतु सरकार को जाति की जनसंख्या के आधार पर आरक्षण निधारित कर देना चाहिए। इससे किसी के अधिकारों का हनन नहीं होगा। सैनी ने कहा कि देश में राज्य सभा की सीट को समाप्त कर देना चाहिए। क्योंकि चोर दरवाजे के रास्ते से राज्य सभा का सांसद बनाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। सैनी ने कहा कि पूर्व में कुछ लोगों के हाथ सत्ता रही है। जिस कारण उन्होंने अपनी जाति विशेष के लोगों को ही उच्च पदों पर प्राथमिकता दी, जबकि दूसरे वर्ग के लोगों को चपरासी तक ही सीमित रखा।
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उन्होंने कहा कि मनरेगा को किसानों के साथ जोड़ देना चाहिए। इससे किसान के खेत हरे-भरे होंगे और मजदूरों को भी रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे। इस मौके पर लोकतंत्र सुरक्षा मंच के जिलाध्यक्ष सुकेन्द्र नहला, सुलतान सिंह ढाणी सांचला, धर्मपाल सोनी, बलवान सिंह ढाणी सांचला, शिशपाल सिंह, कृष्ण कुमार, राजेंद्र सिंह, ओमप्रकाश, बन्सी लाल वर्मा, रामनिवास वर्मा, मानसिंह, राजबीर सिंह, हवा सिंह, गुरदयाल सिंह, रामकुमार ढाणी सांचला, बलबीर सिंह आदि गणमान्य व्यक्ति भी मौजूद थे।
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राष्ट्रहित में पांच मुद्दे :
सांसद सैनी ने कहा कि राष्ट्रहित में पांच मुद्दों को लेकर वह काम कर रहे हैं। समाज में समानता तभी आ सकती है जब हम सभी जातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में उनका हिस्सा निर्धारित कर देंगे। ताकि कोई भी नेता किसी दूसरी जाति का हक मारकर अपनी जाति को न दे सके। इससे किसी की जाति का मुख्यमंत्री बने, वह भेदभाव नहीं कर सकेगा। दूसरा एक परिवार एक रोजगार मुद्दा है, अब तक जिन लोगों के हाथ में सरकार थी उनके परिवारों व उनके रिश्तेदारों के उच्च पदों पर दस-दस लोग लगे मिल जाएंगे। बाकी के लोग चपरासी लगने में भी मोहताज रहे हैं। इसलिए एक परिवार एक रोजगार की नीति अपनाई जाएगी। तीसरे मुद्दे में मनरेगा को किसान मजदूर से जोड़ना, मनरेगा स्कीम में ढाई सौ रुपये मजदूरों को खाली बैठकर दिए जाते हैं। इसमें से आधे पैसे अधिकारियों की भेंट चढ़ जाते हैं और दूसरी तरफ मजदूरों की कमी में किसानों को दोगुना रेट में भी मजदूर नहीं मिलते। इसलिए हम मजदूर किसान के लिए संयुक्त योजना बनाएंगे। जिसमें तीन सौ दिन काम देंगे और ढाई सौ रुपये मनरेगा से और ढाई सौ रुपये किसान देगा। मजदूर को मिल जाएंगे पांच सौ रुपये प्रति दिन।
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