रोडवेज हड़ताल : विद्यार्थी परेशान, घंटों बसों का इंतजार, पैदल जाना पड़ रहा स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। सरकार व रोडवेज कर्मचारियों के बीच हड़ताल को लेकर पिछले 11 दिनों से तनातनी बरकरार है और दोनों के बीच रार बढ़ती ही जा रही है। जिले भर के ही नहीं प्रदेश के कर्मचारी संगठन सरकार के खिलाफ चल रही रोडवेज की हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं और किलोमीटर स्कीम पर सरकार द्वारा लाई जा रही 720 बसों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत चालक व परिचालकों को भर्ती कर रोडवेज की बसों को चलाकर साफ संकेत दे दिए हैं कि इस बार सरकार कर्मचारियों के आंदोलन के आगे झुकने वाली नहीं है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच चल रही इस लड़ाई के बीच यदि सबसे ज्याद परेशानी किसी को हो रही है तो वो है जनता। हड़ताल के चलते 10 दिनों तक गांवों में बसें ना जाने से गांवों का शहर से संपर्क टूट सा गया था। इतना ही नहीं, जिले से दिल्ली व चंडीगढ़ के लिए जाने वाली बसों के बंद होने से व्यापारियों व कर्मचारियों को भी आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। रोडवेज की हड़ताल को लेकर जब आम लोगों के विचार लिए गए तो सरकार व कर्मचारियों के लिए लोगों का मिला जुला जवाब सामने आया। किसी ने सरकार को हड़ताल के लिए दोषी ठहराया तो किसी ने कर्मचारियों को। किसी ने दोनों को बराबर का दोषी माना तो किसी ने सरकार के कर्मचारियों के आगे ना झुकने की बात को सही ठहराया।
गोरखपुर की बेटियों को चार घंटे करना पड़ता है बस का इंतजार
स्कूल व कॉलेज के लिए आने वाली गांव गोरखपुर व धांगड़ की बेटियों को चार-चार घंटे तक बसें नही मिलती। इसी समस्या को लेकर गोरखपुर की लड़कियों ने रोडवेज के टीएम से मुलकात कि और कहा कि सर, क्या गोरखपुर वाली बस जाएगी? इस पर टीएम का जवाब था हां चलने वाली है। तो लड़कियों ने जवाब दिया, सर चार घंटे हो गए अभी तक तो कोई बस नहीं आई। लड़कियों के इस सवाल पर टीएम के पास कोई जवाब नहीं था।
5 किलो. पैदल चलकर बस पकड़ने को मजबूर गांव काजलहेडी के छात्र
बस स्टैंड में बस का इंतजार कर रहे गांव काजल हेडी के अंकुश व पवन ने बताया कि जब से हड़ताल शुरू हुई है उनके गांव में अब तक एक भी बस नहीं गई है। स्कूल आने के लिए उन्हें 5 किलोमीटर पैदल चलकर पड़ोस के गांव बड़ोपल आना पड़ता है इसके बाद उन्हें बड़ोपल से बस मिलती है। छात्र पवन ने बताया कि उन्हें स्कूल पहुुंचते-पहुंचते 10 बज जाते है, तथा गांव में बस नहीं जाने के कारण जाते समय भी 5 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है जिस कारण पिछले 11 दिनों से उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।
पटवारी के एक साइन के लिए करना पड़ा दो घंटे से अधिक का इंतजार
शुक्रवार को जिले के लगभग सभी विभागों के कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश पर जाने से लोगों को भारी परेशानी हुई। शहर की रहने वाली दो महिला संतरो व बबीता को जाति प्रमाण पत्र पर पटवारी के हस्ताक्षर करवाने थे, लेकिन पटवारी के दफ्तर में ना होने से उन्हें दो घंटों तक दफ्तर के बाहर इंतजार करना पड़ा। महिला संतरो ने कहा कि उन्हें दो घंटों से भी ज्यादा समय हो गया इंतजार करते हुए लेकिन अब तक पटवारी नहीं आया।
720 निजी बसें चलाने का फैसला सही, कर्मियों को खत्म करनी चाहिए हड़ताल
बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे गांव जांडली निवासी समत सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा निजी बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत चलाने का फैसला बिल्कुल सही है, क्योंकि उन बसों से भी तो युवाओं को रोजगार मिलेगा। कर्मचारियों को हड़ताल खत्म कर देनी चाहिए। समत सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को अपनी जिद्द छोड़कर बसें चलानी चाहिए ताकि जनता परेशान ना हो।
दस दिन होंगे परेशान होते हुए, कहां है सरकार
गांव दरियापुर निवासी देवीलाल ने कहा कि कर्मचारी दस दिन से हड़ताल पर बैठे है और जनता परेशान हो रही है, सरकार कहां है। देवीलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री को हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों से बात कर हड़ताल को खत्म करवाना चाहिए ताकि जनता को राहत मिले
11 वें दिन जाकर चली दिल्ली-गुरुग्राम के लिए बस
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते शुक्रवार को हड़ताल के 11वें दिन पहली बार फतेहाबाद से दिल्ली व गुरुग्राम के लिए बस सेवा शुरू हुई। इससे पहले वीरवार को जिले की बसों को केवल रोहतक तक ही भेजा गया था। शुक्रवार को दिल्ली व गुरुग्राम के लिए बस सेवा शुरू होने से लोगों को काफी राहत मिली।
मैंने बस स्टैंड में जाकर भी हड़ताल का समर्थन किया था, सरकार ना सिर्फ कर्मचारियों बल्कि प्रदेश कि जनता के साथ भी गलत कर रही है। हड़ताल 11वें दिन में पहुंच गई है लेकिन सरकार का कर्मचारियों व जनता की तरफ कोई ध्यान नहीं है। मुख्यमंत्री को जनहित का ध्यान करते हुए इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
- दुड़ाराम, पूर्व संसदीय सचिव एवं कांग्रेस नेता, फतेहाबाद।
यह बात सही है कि हड़ताल के चलते विद्यार्थियों, व्यापारियों व आमजन को परेशानी हुई है, हमारा लगातार प्रयास है कि ज्यादा से ज्याद बसें चलाई जाए ताकि किसी को भी दिक्कत ना आए। शुक्रवार को रोडवेज की 80 बसें चलाई गई हैं, शनिवार को 120 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।