फतेहाबाद।
सर्दियों की हाड़ कंपा देनी वाली ठंड भी मुहाने पर है। लेकिन इन सबके बीच सर्द रातों में सोने की जगह ढूंढने वाले यात्रियों और आम लोगों के लिए प्रशासन पूरी तैयारियों का दावा जरूर कर रहा है। लेकिन 'अमर उजाला’ की पड़ताल में प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल गई है। रैन बसेरा के नाम पर सर्द रातों में आश्रय देने के लिए भले ही प्रशासन बड़े-बड़े दावे कर रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत ना केवल इन दावों से पलट है बल्कि काफी शर्मनाक भी है। जिस पंचायत भवन में रैन बसेरा बनाने का दावा किया गया है, रैन बसेरे के नाम पर बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर एक 10 बाई 10 का कमरा दिया गया है। इसमें ना तो ठंड से बचने के सही इंतजाम हैं और न ही कोई अन्य सुविधा। इसके अलावा पिछले तीन सालों से पुरानी कचहरी की जमीन पर रैन बसेरे की नई बिल्डिंग बनाने के प्रपोजल पर प्रशासनिक अधिकारियों ने चर्चा तक नहीं की है।
पंचायत भवन के बाहर बोर्ड तक नहीं
'अमर उजाला’ की पड़ताल के दौरान जब 'संवाददाता’ पंचायत भवन की तीसरी मंजिल पर बने कथित रैन बसेरे में पहुंचा तो कमरे के अंदर घुसते ही तेज बदबू से सामना हुआ। मानों महीनों से इस कमरे को साफ ही नहीं किया गया। कहने को रैन बसेरा है लेकिन दस बाई दस के एक सामान्य कमरे में एक के बाद एक चार चाइपाइयां बिछाई गई हैं। इन चारपाइयों पर बिछे गदेलों, तकियों और कंबलों का इतना बुरा हाल है कि इन्हें रात के समय ओढ़ने वाला बीमार हो जाए। चारपाई पर रखे गए गद्दे एवं कंबल हद से ज्यादा मैले हैं मानो कई सालों से इन्हें धोया ही नहीं गया। ऐसी स्थिति में इन कंबलों और बिस्तर पर सोने वाले यात्री ठंड से बचाव कर सकें या ना करें, ये बात की बात है लेकिन इन पर सोने से जरूर बीमार हो जाएंगे।
महिला-पुरुष यात्रियों के नहीं अलग से कोई व्यवस्था
रैन बसेरे को लेकर प्रशासन की तैयारियां कितनी 'काम चलाऊ’ हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रैन बसेरे के लिए महज एक ही कमरा रखा गया है जबकि नियमानुसार महिला एवं पुरुष यात्रियों को अलग-अलग आश्रय देने की व्यवस्था होनी चाहिए। पिछले साल भी रैन बसेरे के लिए आबंटित दो कमरों में से एक कमरे को प्रेमी जोड़ों के लिए सेफ हाऊस में बदल दिया गया था। इस बार तो शुरु से ही एक ही कमरे को रैन बसेरा बनाया गया है।
पुरानी कचहरी में 15 मरले का प्रस्तावित था रैन बसेरा:
पूर्व उपायुक्त डॉ. साकेत कुमार के कार्यकाल में पुरानी कचहरी की जगह पर लगभग 15 मरले की जगह में एक स्थाई रैन बसेरा बनाने का प्रस्ताव जिला प्रशासन लेकर आया था। इतना ही नहीं, प्रशासन की उस योजना के तहत इस भवन के निर्माण पर 80 लाख रुपये खर्च होने थे । पुरानी कचहरी में बनाए जाने वाले रैनबसेरा में महिलाओं व पुरूषों के लिए अलग-अलग से रिहायश की व्यवस्था की बात भी उस समय रखी गई थी। इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए भवन के निर्माण संबंधी नक्शे की मंजूरी के लिए विस्तृत रिपोर्ट चंडीगढ़ भेजी गई थी। लेकिन इस बीच तत्कालीन डीसी डॉ. साकेत कुमार का तबादला हो गया और इसके बाद ये मामला ही ठंडे बस्ते में चला गया। पिछले तीन-चार साल में इस प्रपोजल पर किसी अधिकारी ने कोई चर्चा तक करने का प्रयास नहीं किया।
ना अब तक अलाव की व्यवस्था
नियम मुताबिक ठंड अधिक होने की सूरत में उन सभी जगहों पर सार्वजनिक अलाव जलाने के निर्देश सरकार की ओर से जारी किए गए हैं जहां पर यातायात के साधन रुकते हों या यात्रियों के आने-जाने का स्थान हो। इसके अलावा जिले के बस अड्डों, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर ये सूचनापट लगाने के भी निर्देश थे कि शहर में रैन बसेरे की सुविधा कहां है और वहां तक कैसे पहुंचा जा सकता है। लेकिन फतेहाबाद में ऐसेे किसी भी निर्देश का पालन नहीं हो रहा।
रैन बसेरे को और बेहतर बनाने के लिए रेडक्रॉस और नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए जाएंगे। मैं खुद भी व्यवस्था देखूंगा। सर्दियों में लोगों को ठंड से बचाने के लिए बाकी आवश्यक प्रबंध भी किए जाएंगे। ’
हरदीप सिंह, जिला उपायुक्त, फतेहाबाद ।