फतेहाबाद। नगर परिषद कर्मचारियों की हड़ताल से व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। पांच शहरों में 1650 टन कचरा जमा हो चुका है। हालात ये है कि कचरे के ढेर में आग लगाई जा रही है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चुप्पी साधे हुए है। बाजार में सफाई नहीं होने से बदबू फैलने लगी है। नगर परिषद कर्मचारियों ने सोमवार को शाखाओं में काम भी नहीं होने दिया।
नगर परिषद की सभी शाखाओं में सोमवार को काम बंद रहा। इसके चलते जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, गृहकर, बिल्डिंग ब्रांच, प्रॉपर्टी आईडी, विवाह प्रमाणपत्र शाखा में काम नहीं हुआ और लोगों को बिना काम हुए लौटना पड़ा। दूसरी तरफ कर्मचारी संघ ने हड़ताल को अब 14 मई तक बढ़ा दिया है। कर्मचारियों के इस रुख से आने वाले दिनों में नागरिक सेवाएं और अधिक प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है।
यूनियन नेताओं ने सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार इस समय कुंभकर्णी नींद सोई हुई है। हठधर्मिता और अडियल रवैये पर कायम है। स्थिति यह है कि सरकार न तो कर्मचारियों की मांगों को सही ठहरा रही है और न ही उन्हें गलत बताकर खारिज कर रही है बल्कि मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रही है। इस कारण शहरों में गंदगी के अंबार लग चुके हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
मांगें नहीं मानने तक संघर्ष रहेगा जारी
नगर पालिका कर्मचारी संघ ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार उनकी जायज मांगों पर संज्ञान नहीं लेती, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। सोमवार के प्रदर्शन में इकाई प्रधान नरेश राणा, सचिव ओम प्रकाश लोट सहित अन्य कर्मचारी नेताओं ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। कर्मचारी नेता रमेश तुषामड, विजय ढाका और वीरू रत्ती ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में सफाई कर्मचारियों की एक भी पक्की भर्ती नहीं की गई है। यह दर्शाता है कि सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े दलित और अति-दलित सफाई कर्मचारियों के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार अपनी तानाशाही छोड़कर सुप्रीम कोर्ट और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के फैसलों का सम्मान करे।
चेतावनी- 14 के बाद आंदोलन और उग्र होगा
यूनियन नेताओं ने कहा कि कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए, नए पद सृजित हों और समान काम-समान वेतन के सिद्धांत को 60 प्रतिशत भत्तों के साथ लागू किया जाए। नेताओं ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अब यह गेंद सरकार के पाले में है। यदि सरकार चाहती है कि जनता गंदगी के ढेर और असुरक्षा के साए में न रहे, तो उसे तुरंत बातचीत के जरिए समाधान निकालना होगा, अन्यथा 14 मई के बाद यह आंदोलन और उग्र रूप धारण करेगा।