शहर के पुराने तहसील चौक क्षेत्र में दर्जनों इमारतें गिरने के कगार पर हैं। थोड़ी सी बारिश होने पर ही यहां हादसा होने का खतरा है, लेकिन नगर परिषद लापरवाह बना हुआ है। ये इमारतें 150 सौ साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। पिछली बार मानसून के दौरान ही इंडस्ट्रियल एरिया में जर्जर इमारत गिरने से युवा व्यवसायी सहित दो की मौत हो गई थी। तब प्रशासन ने जर्जर इमारतों को नोटिस देने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद क्या हुआ इसका जवाब किसी जिम्मेदार के पास नहीं है।
शहर के तहसील चौक क्षेत्र में 150 साल से भी पुरानी इमारतें बनी हुई हैं। यहां पुरानी आबादी में संकरी गलियों में बरसों पहले लोग इन मकानों में रहा करते थे। यहां के वाशिंदे इन भवनों को छोड़कर नई विकसित कालोनियों में जा बसे और यह भवन या तो किराए पर दे दिए या कोई बाहर का प्रवासी मजदूर मजबूरी में रह रहा है। गलियां आज भी संकरी हैं।
इन मकानों की मरम्मत और देखभाल न होने से सभी मकान जर्जर हालत में हैं, जिनकी संख्या 150 से भी ऊपर है। लोगों ने कई बार जिला प्रशासन से मिलकर इन भवनों के समाधान की मांग की थी। तहसील चौक निवासियों का कहना है कि भवन अत्यंत जर्जर हैं, इसलिए इनके मालिकों को नोटिस देकर भवन गिराया जाए या नगर परिषद कार्रवाई करे, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों है। इसी तरह इंडस्ट्रियल एरिया, अशोक नगर, आजाद नगर में भी कई इमारतों को कंडम घोषित किया जा चुका है।
जब पुरानी इमारतें गिरने से हुए हादसे
-श्याम मंदिर के सामने वाली गली में चार साल पहले जर्जर मकान बरसात के दिनों में गिर गया था, जिसमें दो प्रवासी मजदूर दब गए। इनमें एक की मौत हो गई थी।
-पिछले साल सितंबर माह में हाईवे स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में एक बिस्कुट फैक्ट्री का लेंटर गिरने से फैक्ट्री मालिक के बेटे और एक मजदूर की मौत हो गई थी। इस भवन को भी नगर परिषद ने कंडम घोषित कर रखा था। बावजूद इसके यहां कंस्ट्रक्शन चल रहा था। हादसे में आधा दर्जन मजदूर भी घायल हुए थे।
नोटिस तक सिमटी नप की कार्रवाई
बिस्कुट फैक्ट्री में हादसे के बाद नगर परिषद प्रशासन ने आनन फानन में जर्जर भवनों के सर्वे की बात कही कुछ दिनों बाद नगर परिषद ने सात भवन मालिकों को नोटिस दिया और भवन नहीं गिराने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई। एक साल बाद भी आज भी स्थिति जस की तस है। नगर परिषद प्रशासन उससे एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा।
क्या कहते हैं मोहल्लावासी
तहसील चौक के मोहल्ला डेरेवाला निवासी निर्मल शर्मा ने बताया कि उनके आसपास दर्जनों मकान गिरने की कगार पर हैं। थोड़ी सी बारिश के बाद इनके गिरने की संभावना और बढ़ जाती है। इस बारे में वह कई बार नगर परिषद को शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
लंग मोहल्ला निवासी शिव निवास ने कहा कि दो वर्ष पहले उसके पड़ोस में मकान गिर गया था। मकान अत्यंत पुराना था ऐसी हालात में पड़ोस में दो और मकान हैं। इसे शीघ्र ही गिराकर मालिकों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
तहसील चौक निवासी सुरेश कुमार ने कहा कि नगर परिषद सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेवारी से किनारा कर लेती है। पुराने भवनों को चिह्नित कर मकान मालिकों पर कार्रवाई की जाए।
बरसात के दिनों में कंडम इमारतें गिरने का भय रहता है। बीते वर्ष फैक्ट्री हादसे के बाद नगर परिषद ने सात जर्जर भवनों के मालिकों को नोटिस दिए थे। अब उन पर कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा शहर में कितने जर्जर भवन हैं, कहां-कहां कंडम भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, इसका सर्वे करवाया जाएगा।
ओपी सिहाग, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद फतेहाबाद