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पंजाबी सभा अस्पताल गबन की जांच सीबीआई करेगी, इसका फैसला होगा 12 फरवरी को

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पंजाबी सभा अस्पताल गबन मामले में कोर्ट ने सीबीआई और सरकार से मांगा जवाब
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। पंजाबी सभा अस्पताल गबन के मामले में अस्पताल के संस्थापक सदस्य ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में बताया कि करीब 4 साल बीत जाने के बाद भी अस्पताल में हुए गबन की जांच सरकार द्वारा नहीं की जा रही, जबकि बार-बार इस जांच को प्रभावित करने के लिए बदला जा रहा है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सीबीआई व हरियाणा सरकार को 12 फरवरी के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगर हाईकोर्ट सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुई तो इस मामले की जांच सीबीआई के पास चली जाएगी। याचिकाकर्ता के वकील अतुल लखनपाल ने इसकी पुष्टि की है।
अस्पताल के संस्थापक सदस्य हरबंस लाल वढ़ेरा ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर याचिका में बताया कि पिछले करीब 4 साल से अस्पताल में फर्जी हस्ताक्षर करके सभा के फर्जी मेंबर बनाए गए तथा सभा में गबन किया गया। इस मामले में 18 अप्रैल 2016 को हरबंस लाल वढ़ेरा ने सभा के चेयरमैन चंद्रभान, नंदलाल चौधरी, महेंद्र मेहता, मदन मुटरेजा, हंसराज चौधरी व पूर्ण डुडेजा के खिलाफ 18 लाख रुपये के गबन का मामला दर्ज करवाया था। वढ़ेरा ने अपने वाद में बताया कि 18 लाख का गबन एक साल के मिलान में पाया गया, जबकि अस्पताल का संचालन उपरोक्त लोगों के हाथ में 7 साल रहा। ऐसे में करोड़ों रुपये की राशि को खुर्द-बुर्द कर दिया गया। उन्होंने इस मामले में सरकार से व अदालत से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन सरकार ने हर बार दबाव बनाने का प्रयास किया। इसके विपरीत आरोपियों ने उनके खिलाफ व ओमप्रकाश सरदाना, खैरातीलाल धुडिय़ा, सुनील चौधरी आदि पर क्रॉस केस दर्ज करवा दिए। वाद में बताया गया कि उन्होंने अस्पताल अपनी देखरेख में खड़ा करवाया, लेकिन उन पर ही केस दर्ज करवा दिए गए। उनके आग्रह पर फतेहाबाद की सीजेएम कोर्ट की निगरानी में भी जांच हो रही है।
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पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के जस्टिस महाबीर सिंह सिद्धू ने सीबीआई व हरियाणा सरकार को इस मामले में नोटिस जारी करके 12 फरवरी को जवाब देने को कहा है। साथ ही सवाल किया है कि क्यों न इस मामले में हो रही देरी को देखते हुए इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। उच्च न्यायालय के नोटिस के बाद पंजाबी सभा अस्पताल के चंद्रभान व जांच में नाकाम रही पुलिस की टीम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इस मामले की पैरवी कर रहे हाईकोर्ट के वकील अतुल लखनपाल व आरएस चहल ने बताया कि मामले की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।
4 जिलों की पुलिस कर रही है जांच, हाथ खाली
डीजीपी के आदेश के बाद इस मामले की जांच फतेहाबाद पुलिस को दी गई थी, लेकिन कुछ समय बाद चंद्रभान के पक्ष ने फतेहाबाद पुलिस पर अविश्वास जताते हुए जांच दूसरे जिले की पुलिस को दिए जाने की मांग की थी। तब पुलिस महानिदेशक ने मामले की जांच हिसार पुलिस को सौंपी थी। लेकिन जांच पूरी ना होते देख एक पक्ष ने फिर से जांच बदलने की मांग की थी। इस पर कार्यवाही करते हुए डीजीपी ने मामले की जांच जींद जिले के एसपी को सौंप दी थी। जींद एसपी ने इस मामले में एसआईटी गठित कर इस मामले की जांच शुरू की थी कि डीजीपी कार्यालय से एक बार फिर इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को बदलने का निर्देश आ गया था। आशंका जताई गई थी कि राजनीतिक कारणों के चलते जांच को बार-बार एक जिले से दूसरे जिले में शिफ्ट किया जा रहा है ताकि इसमें अनावश्यक देरी की जा सके। अब पिछले दिनों डीजीपी ने ये जांच सिरसा के एसपी को सौंपी है। सिरसा एसपी ने इस मामले में जांच के लिए एसआईटी गठित करते हुए सिरसा के डीएसपी रविंद्र कुमार व ऐलनाबाद के डीएसपी साधुराम को इस मामले की जांच सौंपी थी। लेकिन अभी तक कोई भी जांचकर्ता इस मामले को सिरे नहीं चढ़ा सका है।
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मैंने पंजाबी सभा अस्पताल खड़ा किया, लेकिन कुछ लोगों ने मिलीभगत करके गबन तो किया ही साथ में फर्जी मेंबर भी बना डाले, जिनके हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। इस मामले में मैंने शहर थाने में केस दर्ज करवा रखा है, लेकिन अभी तक मामले की जांच पूरी नहीं हो पा रही। अब हाईकोर्ट में याचिका डालकर इस मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द करने की मांग की है।
- हरबंस लाल वढ़ेरा, संस्थापक सदस्य, पंजाबी सभा अस्पताल एवं याचिकाकर्ता।
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