फतेहाबाद। पराली जलाने के मामले में पूरे प्रदेश में फतेहाबाद जिले को नंबर वन पर पहुंचाने में दस गांव अधिक जिम्मेदार बनकर निकले हैं। ये सभी दस गांव पिछले साल भी पराली जलाने के मामले में आगे रहे थे, लेकिन प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई न करने के चलते इस साल भी इन गांवों के किसानों ने खेत में खड़ी पराली फूंक दी है। अब प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस डेसी फतेहाबाद जिले के दौरे पर आ रहे हैं, उससे पहले ही कृषि विभाग पराली के मामलों को लेकर आंकड़ों को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
उधर डीसी-डीडीपीओ सहित जिले के तमाम अधिकारियों ने भी खेतों का रुख कर लिया है ताकि किसानों को समझाया जा सके। पराली प्रबंधन करने वाले किसानों को जिला प्रशासन प्रोत्साहित करने का भी पूरा प्रयास कर रहा है। फिलहाल तक तो फतेहाबाद जिला प्रशासन के लिए राहत की बात ये है कि पिछले साल के मुकाबले अभी तक पचास फीसदी कम खेतों में पराली को आग लगाने की घटनाएं सामने आई हैं।
ये दस गांव हैं इस बार पराली जलाने में सबसे आगे
गांव का नाम पराली जलाने की घटनाएं
जमालपुर 60
साधनवास 50
शक्करपुरा 42
टोहाना 33
भूना 34
कुलां 22
मुंदलीय 25
कमाना 25
रतिया 31
बबनपुर 32
पिछले साल 35 सौ से अधिक मामले आए थे सामने, इस बार आधी घटनाएं, हालात फिर भी चिंताजनक
जिला उपायुक्त डा. जेके आभीर, डीडीपीओ अनुभव मेहता व कृषि उपनिदेशक बलवंत सहारण के प्रयासों के चलते इस साल पराली जलाने की घटनाओं में तकबरीन 50 फीसदी की कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। दरअसल पिछले साल फतेहाबाद जिले में पराली जलाने की कुल 35 सौ से अधिक घटनाएं सामने आई थी, जबकि इस साल अभी तक कुल 1852 मामले सामने आ चुके हैं। जिला प्रशासन के लिए सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि पराली जलाने के मामले में फतेहाबाद जिला पूरे प्रदेश में पहले नंबर पर आ चुका है और इसी के चलते खुद प्रदेश के मुख्य सचिव फतेहाबाद जिले के अधिकारियों की बैठक लेने के लिए सोमवार को फतेहाबाद आएंगे।
488 किसानों को दिए गए नोटिस, 30 नवंबर तक खेतों में ठीकरी पहरा जारी रखने के आदेश
जिला प्रशासन पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। अभी तक कुल 1852 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसमें से 488 किसानों को चिह्नित करके उन्हें नोटिस कृषि विभाग द्वारा थमाया जा चुका है। बाकी किसानों की पहचान का काम तेजी से किया जा रहा है। उधर शनिवार को अधिकारियों की एक विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला उपायुक्त डा. जेके आभीर ने निर्देश जारी किए हैं कि 30 नवंबर तक खेतों में ठीकरी पहरे जारी रखे जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने कृषि विभाग को भी आदेश दिए हैं कि पराली जलाने वाले किसानों को नियमानुसार नोटिस भेजकर उन्हें जुर्माना किया जाए। उनके शस्त्र लाइसैंस रद्द किए जाने के आदेश पहले ही जिला प्रशासन दे चुका है।
डीसी-डीडीपीओ खुद पहुंचे खेतों में, पराला प्रबंधन करने वाले किसानों का बढ़ाया हौंसला
पराली जलाने के मामले में प्रदेश में नंबर एक पर आने के बाद जिला प्रशासन भी एकाएक खासा सक्रिय हो गया है। जिला उपायुक्त डा. जेके आभीर इस पूरे सीजन में पराली प्रबंधन करने वाले किसानों की हौंसलाअफजाई सोशल मीडिया पर करते रहे हैं। इसी के चलते शुक्रवार व शनिवार को उन्होंने और डीडीपीओ अनुभव मेहता ने विभिन्न गांवों के किसानों से मिलकर उनके द्वारा पराली ना जलाने के निर्णय की तारीफ की और उनको दूसरों के लिए प्रेरणादायक बताया।