अमर उजाला ब्यूरो
भूना।
गांव बैजलपुर के निकट स्थित भाखड़ा नहर में तीन बच्चों की मां ने बीमारी से तंग आकर छलांग लगा ली। इसके बाद ग्रामीणों ने महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक महिला के पेट के अंदर ज्यादा पानी चला गया था। ग्रामीणों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भूना में एंबुलेंस के लिए बार-बार फोन किया गया, मगर एंबुलेंस पौने घंटे देरी से पहुंची। गंभीर हालत में उसे उपचार के लिए सीएचसी ले आए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। महिला पिछले कई दिनों से शारीरिक रूप में अस्वस्थ होने के कारण मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए फतेहाबाद भिजवा दिया। बहरहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
जानकारी के अनुसार टोहाना रोड भूना निवासी 32 वर्षीय बीरमति पत्नी सूबे सिंह बुधवार सुबह 11 बजे अपनी दवाई लेने की बात कहकर उकलाना रोड पर स्थित एक निजी अस्पताल जाने के लिए घर से निकली थी, किंतु दोपहर बाद तक भी घर पर नहीं लौटी। इस पर परिजनों को चिंता होने लगी और उन्होंने संबंधित डॉक्टर के क्लीनिक में जाकर पूछताछ की तो पता लगा कि वह क्लीनिक में आई ही नहीं। परिजनों ने मोबाइल फोन के माध्यम से परिचितों से पूछताछ की, किंतु बीरमति का कोई सुराग नहीं मिला।
उधर शहर से 7 किलोमीटर दूर स्थित गांव बैजलपुर की भाखड़ा नहर पर कुछ लोगों ने एक महिला को डूबते हुए देखा तो उन्होंने बीरमति को नहर से बाहर निकालकर गंभीर हालत में उपचार के लिए सीएचसी ले आए। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस बीट इंचार्ज एएसआई सोमनाथ व कृष्ण कुमार ने बताया कि बीरमति के भाई सुनील कुमार के ब्यान पर पुलिस ने इत्तफाकिया कार्रवाई की है।
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तीनों बच्चों के लिए खरीदे थे कपड़े
टोहाना रोड के वार्ड नबर-1 निवासी बीरमति तीन बच्चों की मां थी। इनमें सबसे बड़ा बेटा 12 वर्षीय आयुष है। जबकि 9 वर्षीय अंजू तथा 6 वर्षीय सोनिया है। डूबने से पहले बीरमति ने अपने तीनों बेटों के कपड़े भी एक दुकान पर खरीदकर घर पहुंचाए थे। बीरमति के डूबने की सूचना मिलने के बाद तीनों बच्चों व पति का रो रोकर बुरा हाल बना हुआ है।
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एंबुलेंस असुविधा ने निगल ली जिंदगी
गांव बैजलपुर के सरपंच शमशेर सिंह ने बताया कि महिला को नहर में डूबने से पहले ही बचा लिया गया था। किंतु शरीर के अंदर पानी अधिक मात्रा में चले जाने के कारण उसकी हालत बिगड़ी हुई थी। इसलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भूना में एंबुलेंस के लिए बार-बार फोन किया गया। मगर पौने घंटे देरी से पहुंची एंबुलेंस बीरमति के लिए काल साबित हुई। सरपंच ने कहा कि यदि समय पर एंबुलेंस आ जाती तो महिला की जिंदगी को बचाया जा सकता था।
वर्जन
भूना अस्पताल की एंबुलेंस किसी मरीज को लेने गई हुई थी। दूसरी एंबुलेंस फतेहाबाद कंट्रोल रूम में फोन करके फतेहाबाद से मंगाई गई। इसके कारण एंबुलेेंस को आने में देरी हुई।
- डा. क्रांति, कार्यवाहक एसएमओ स्वास्थ्य केंद्र भूना